करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) में आयोजित प्रकृति महोत्सव के दौरान सात दिवसीय पुस्तक मेले में संस्कृति के उन्नयन का प्रयास किया गया। भले ही आम बुद्धिजीवी सीधे तौर पर मेले से न जुड़ सके हों लेकिन मेले में प्रदर्शित की गई दो लाख पुस्तकों में से 15 लाख रुपये से अधिक की किताबों की खरीदारी की गई। इसमें लेखक अनुपम मिश्र की प्रकृति पर आधारित पुस्तक आज भी खरे हैं तालाब जहां सर्वाधिक बिकी, वहीं डीजीपी शत्रुजीत कपूर की लिखी अंग्रेजी पुस्तक वायर्ड फॉर सक्सेस युवाओं की पसंद बनी रही। डिजिटल दुनिया के इस दौर में किताबें कहीं पीछे छूटती जा रही हैं, लोगों में किताबों को पढ़ने आदत कम चुकी है, विद्यार्थी भी सिर्फ पाठ्यक्रम की पुस्तकों से बाहर की किताबें पढ़ने के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं। ऐसे में हरियाणा के पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर की पहल पर राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल ने प्रकृति महोत्सव के साथ-साथ पुस्तक मेला आयोजित करने का निर्णय लिया था।
एनडीआरआई के निदेशक डॉ.धीर सिंह ने बताया कि करीब दो लाख रुपये की पुस्तकों को खरीदकर मेले में आए अतिथियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों को वितरित की गई हैं। आयोजन समिति के सचिव डॉ.जय कौशिक ने बताया कि एनडीआरआई सहित करनाल स्थित विभिन्न शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों और अधिकारियों कर्मचारियों ने पुस्तक मेले से अपनी पसंदीदा लेखकों की पुस्तकें खरीदी हैं। एनडीआरआई ने भी 58 हजार रुपये की पुस्तकें खरीदी हैं। मेले में डीजीपी शत्रुजीत कपूर द्वारा लिखी गई पुस्तक वायर्ड फॉर सक्सेस को युवाओं ने खूब पसंद किया है। शोधार्थियों की भी ये पुस्तक पहली पसंद रही, इस पुस्तक में घाटे से जूझती बिजली कंपनियों को मुनाफे में लाने बारीक कवायद दशाई गई है। इसी मुनाफे से अब केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की आधुनिक पुस्तकालयों को गांव तक पहुंचाने की पहल पर कार्य शुरू कर दिया गया है। पुलिस लाइन में सरदार पटेल पुलिस पुस्तकालय बनाए जा रहे हैं। इसी मेले से इन पुस्तकालयों के लिए भी 4.50 लाख रुपये की किताबें खरीदी गई हैं।
पुलिस पीआरओ (आउटरीच) राजीव रंजन ने मुंशी प्रेमचंद की गोदान भी लोगों की पसंद रही है। करनाल सहित कई जिलों के विद्यालयों ने करीब 17 प्रकाशकों को करीब चार लाख रुपये से अधिक पुस्तकों के ऑर्डर भी दिए हैं। मेले में आठ लाख रुपये से अधिक की नगद किताबे खरीदी गई हैं।