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Karnal News: ब्लूटूथ से कमजोर हो रही सुनने की क्षमता

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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। ब्लूटूथ ईयरफोन का उपयोग लगातार बढ़ रहा है, खासकर युवाओं में। हालांकि यह सुविधाजनक है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग से कानों और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। जिला नागरिक अस्पताल से ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जयवर्धन का कहना है कि लंबे समय तक और तेज आवाज में ब्लूटूथ ईयरफोन का इस्तेमाल सुनने की क्षमता में स्थायी नुकसान और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का कारण बन रहा है। डॉ. जयवर्धन ने बताया कि रोजाना 150 मरीजों की ओपीडी में करीब 15 प्रतिशत मरीज इन समस्याओं को लेकर आ रहे हैं, जिनमें आधे से ज्यादा युवा शामिल हैं।
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य संधु बताती हैं कि ब्लूटूथ का लंबे समय तक तेज आवाज में इस्तेमाल करने से उससे निकलने वाली रेडिएशन से शरीर के बायोकेमिकल तत्व प्रभावित होते हैं जिससे शरीर में चिंता, अवसाद जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि खासकर स्कूल व कॉलेज में जाने वाले युवाओं में ये समस्याएं बढ़ रही हैं जो किसी काम की वजह से गेमिंग या गाने सुनने के लिए ब्लूटूथ का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने बताया कि इससे युवाओं में हर छोटी बात पर चिड़ने और एकाग्रता कम होने की समस्या बढ़ रही है।
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डॉ. जयवर्धन बताते हैं कि ब्लूटूथ ईयरफोन का लंबे समय तक उपयोग कानों की संवेदनशील कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। साथ ही ब्लूटूथ से उत्पन्न होने वाली रेडिएशन भी कान के अंदर की कोशिकाओं को प्रभावित करती है, जिससे सुनने की क्षमता में स्थायी गिरावट होने लगती है। वहीं, अधिक उपयोग से कानों में दर्द, दबाव और टिनिटस (कानों में गूंज) जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
उन्होंने बताया कि लघु समय के लिए हुए टिनिटस की समस्या तो पांच से छह महीने में ठीक हो सकती है, लेकिन दीर्घकालिक समय तक अगर समस्या की पहचान न हो और नजरअंदाज किया जाए तो इसे ठीक होने में कई साल लग सकते हैं। उन्होंने बताया कि ये समस्याएं खासतौर पर कॉल सेंटर, जिम पर्सन, वर्क फ्राम होम और स्कूल-कॉलेज जाने वाले युवा और 25 से 30 वर्ष की उम्र के लोगों में बढ़ रही है।
डॉ. जयवर्धन के अनुसार ब्लूटूथ का दबाव कान के पर्दे ईयरड्रम पर भी पड़ सकता है, जिससे सूजन और कभी-कभी कान का पर्दा फटने का खतरा बन जाता है। इसके अलावा कान में ब्लूटूथ लंबे समय तक लगाने से कान में मैल ज्यादा इकट्ठा हो जाता है जो एक समय के बाद उसे ब्लॉक कर देता है जिससे सुनने में कठिनाई महसूस होने लगती है।
उन्होंने बताया कि इन समस्याओं की जांच के लिए पीटीए और एएसएसआर टेस्ट किया जाता है। पीटीए टेस्ट प्राथमिक जांच के लिए किया जाता है जिसमें केवल सुनाई देने की जांच की जाती है। इससे पता लगाया जाता है कि इंसान की सुनने की क्षमता कितनी कम या ज्यादा है। दूसरा एएसएसआसर टेस्ट किया जाता है, जो कान के पर्दे पर सूजन, मैल या प्रभावित नसों की जांच करने के लिए किया जाता है।
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बचाव के उपाय : डॉ. जयवर्धन ने बताया कि ब्लूटूथ ईयरफोन का सुरक्षित उपयोग बहुत महत्वपूर्ण है। सुनने का स्तर हमेशा 60 प्रतिशत से कम रखा जाए और एक घंटे से अधिक समय तक लगातार सुनने से बचा जाए। हर 30 मिनट के बाद कानों को आराम देने के लिए 10 से 15 मिनट का ब्रेक लिया जाए। यदि कानों में दर्द, दबाव या सुनने में कोई कमी महसूस हो रही हो, तो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
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