घरौंडा में गलत चकबंदी के खिलाफ आंदोलन कर रहे पांच गांवों के किसानों ने रविवार को काली दिवाली मनाई और संत गोपालदास के नेतृत्व में धरना दिया। ग्रामीणों ने मौके पर खून से हस्ताक्षर कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन तैयार किया। इससे पूर्व किसान काला दशहरा मना चुके हैं।
किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी जमीनें वापस नहीं मिलती, वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। उन्होेंने आरपार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। चकबंदी के खिलाफ डटे लालूपुरा, भरतपुर, अराईपुरा, कालरम, अमृतपुर खुर्द के किसानों ने रविवार को ज्ञानपुरा कॉलेज के सामने संत गोपालदास के नेतृत्व में धरना दिया। किसानों ने जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर अधिकारियों पर अनदेखी का आरोप लगाया।
ग्रामीणों ने धरने में स्थानीय नेताओं को भी नहीं बख्शा और उनके खिलाफ भी गुस्सा जाहिर कर नारेबाजी की। धरने पर संत गोपालदास ने अपने खून से सभी ग्रामीणों को तिलक किया और ग्रामीणों ने खून से एक चादर पर हस्ताक्षर करके महामहिम के लिए ज्ञापन बनाया। तय हुआ है कि ज्ञापन रूपी यह चादर संत गोपालदास के अल्टीमेटम के बाद महामहिम को सौंपी जाएगी।
धरने की अध्यक्षता कर रहे प्रदीप मराठा व राजबल राणा ने कहा कि लगभग तीन माह से गलत चकबंदी की दोबारा निशानदेही कराने के लिए किसान प्रशासन से मांग करते आ रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। प्रशासन दूसरे लोगों के साथ मिलकर उन्हें केवल कोरे आश्वासन दे रहा है। दो दिन पहले संत गोपालदास के नेतृत्व में करनाल सचिवालय पर एक दिवसीय धरना दिया गया था और समस्या हल करने का 15 दिन का अल्टीमेटम दिया गया था।
अगर समय रहते समस्या का हल नहीं हुआ तो ग्रामीण गांव से पलायन करके दिल्ली कूच करेंगे। यहां कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निवास स्थान के सामने धरना देंगे। धरने के दौरान स्थानीय नेताओं की ओर से ग्रामीणों का सहयोग नहीं करने पर किसानों का गुस्सा उनके खिलाफ भी भड़क गया और उन्होंने सभी नेताओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दोपहर तीन बजे ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए संत गोपालदास ने अपना खून निकालकर ग्रामीणों को तिलक लगाना शुरू कर दिया।
सभी ग्रामीणों ने उसके खून से तिलक किया और उनकी सफेद चादर पर हस्ताक्षर भी किए। संत गोपालदास ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने हकों के लिए लड़ना चाहिए और जो लोग अपने हकोें के लिए नहीं लड़ सकते, वे किसी भी मंजिल तक नहीं पहुंच सकते। किसानों की समस्या का समाधान करने के लिए प्रशासन को 15 दिन का समय दिया गया है।
अगर समय रहते समस्या का कोई हल नहीं हुआ तो खून से हस्ताक्षर सहित चादर को महामहिम प्रणव मुखर्जी को ज्ञापन के रूप में साैंपा जाएगा। धरने पर अकेला राणा, महीपाल राणा, नरेंद्र मराठा, रामनिवास सैनी, सपट्र सैनी, मामराज सैनी, रूलाराम, सुरेंद्र शर्मा, शीशपाल, मेहर सिंह, भतेरी, सुंदरी मराठा, अनु राणा सहित सैकड़ों महिलाएं व पुरुष उपस्थित रहे।