करनाल। स्थानीय निकाय चुनाव का दायरा मुख्यत: गली, मुहल्लों, कॉलोनियों और सेक्टरों के मुद्दों पर ही केंद्रित रहा। जीटी बेल्ट के अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, यमुनानगर और कैथल के निकाय चुनावों में मेयर, निकाय अध्यक्ष और पार्षद पद के लिए हाथ आजमा रहे प्रत्याशियों ने जीत के लिए खूब जोरआजमाइश की। डोर-टू-डोर संपर्क का जोर तो दिखा मगर दलों के दिग्गजों ने इस चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बनाकर रखा।
आज इन सभी प्रत्याशियों और दिग्गजों की मेहनत को मतदाताओं ने फल प्रदान करना है। सभी प्रत्याशी खूब उत्साहित हैं और अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं मगर उनकी बेचैनी बढ़ा रही है मतदाताओं की चुप्पी। प्रत्याशियों के जनसंपर्क अभियान के दाैरान मतदाताओं ने किसी को नाराज नहीं किया। बाकायदा उन्होंने अपने घरों व प्रतिष्ठानों के बाहर सभी के प्रचार संबंधी झंडे व स्टीकर लगवाने से परहेज भी नहीं किया लेकिन आज ये स्याना मतदाता वोट करने से पहले फैसला अपने विवेक से ही करेगा, क्योंकि न तो इस चुनाव में जातिवाद हावी दिखा और न ही राज्य व केंद्र स्तर के मुद्दों की चर्चा हुई। इन चुनाव में बात हुई तो सिर्फ स्थानीय स्तर पर विकास की। लिहाजा यह तय है कि मतदाता उसी को अपने वार्ड व निकाय का चाैधरी बनाएगा, जिससे उसे गली-मुहल्लों के विकास की आस होगी।
ऐसी स्थिति में बड़ा दांव भाजपा ने खेला है।
भाजपा ने ट्रिपल इंजन की सरकार के सहारे मतदाताओं को केंद्र से लेकर वार्ड तक अवरूद्ध विकास की बात समझाई। उन्हें समझाया गया कि स्थानीय स्तर तक विकास के लिए किसी भी प्रकार का ‘बैरियर’ नहीं होना चाहिए। जीटी बेल्ट में यह बात बखूबी ढंग से न केवल मुख्यमंत्री बल्कि केंद्रीय व राज्य मंत्रियों और स्थानीय विधायक ने वोटरों को बताई। भाजपा दिग्गजों को उम्मीद है उनका यह कार्ड प्रभावशाली रहेगा।
दूसरी ओर, कांग्रेस की बात करें तो इन चुनाव में कांग्रेस केवल चुनावी रण में अपनी मौजूदगी दिखाने का प्रयास करती नजर आ रही है, वे भी सिर्फ कुछेक क्षेत्रों में। संगठन और प्रभावशाली नेतृत्व की कमी से जूझ रही कांग्रेस का सूबे में शायद यह पहला चुनाव होगा, जिसमें धार कुंद दिखी। जहां कांग्रेस के प्रत्याशी खड़े हैं, वहां तो टक्कर अच्छी है और वे जीत के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं लेकिन कई जगह कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी ही नहीं उतारे। जीटी बेल्ट में ऐसी स्थिति में किसी बड़े स्टार प्रचारक की धमक भी नहीं दिखी, जब खुद सूबे के सीएम नायब सैनी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कमान संभाल रखी हो।
आम आदमी पार्टी, जजपा, इनेलो और बसपा इन सियासी दलों का इन चुनाव में कोई सक्रियता नहीं दिख रही है। सूत्र बताते हैं कि इन दलों को वार्डों में उतारने के लिए इस बार पर्याप्त प्रत्याशी ही नहीं मिले। जिनकी इच्छा थी, वे आजाद ही खड़े हो गए। ऐसे में इन दलों के लिए सियासी क्षेत्र में वजूद बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों से कुछेक ऐसे प्रत्याशी भी बताैर आजाद मैदान में उतरे हैं, जिन्हें भाजपा से टिकट नहीं मिल पाई। उनकी इस बगावत से क्या समीकरण बनते हैं और विरोधियों को क्या लाभ होता है, ये देखना होगा।
ये धुरंधर हैं मुकाबले में- अंबाला सिटी में मेयर पद का उपचुनाव है। यहां भाजपा नेता एडवोकेट संदीप सचेदवा की पत्नी सैलजा सचदेवा मैदान में हैं। उन्हें टक्कर दे रही हैं कांग्रेस से पूर्व पार्षद दलीप बिट्टू चावला की पत्नी अमीषा चावला। मुकाबला रोचक है, क्योंकि वर्तमान में सिटी के विधायक पूर्व मंत्री निर्मल सिंह हैं।
- अंबाला सदर नगर परिषद में अध्यक्ष पद के लिए भाजपा से स्वर्ण काैर मैदान में हैं। मंत्री अनिल विज का खुला समर्थन है। मुकाबले में हैं विज के खिलाफ विस चुनाव लड़ चुकीं चित्रा सरवारा की समर्थित मनदीप काैर। यहां भी टक्कर अच्छी है।
- करनाल में पूर्व मेयर रेणु बाला गुप्ता दोबारा मेयर पद के लिए ताल ठोक रही हैं। सीएम नायब सिंह सैनी व केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल जोर लगा रहे हैं। कांग्रेस के प्रत्याशी मनोज वधवा भी अच्छी टक्कर दे रहे हैं। मुकाबला रोचक है।
- इंद्री नगर पालिका में अध्यक्ष पद के लिए मुख्य मुकाबला भाजपा से जसपाल बैरागी और आजाद उम्मीदवार राकेश पाल के बीच दिख रहा है। कर्मबीर कश्यप भी जोर लगा रहे हैं।
- नीलोखेड़ी निकाय में अध्यक्ष पद के लिए पूर्व अध्यक्ष सनमीत काैर फिर मैदान में हैं। उन्हें टक्कर दे रहे हैं आजाद प्रत्याशी प्रेम मुुंजाल और जगजीत काैर। दोनों आजाद प्रत्याशियों के परिजन भी पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं।
- असंध निकाय में अध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने सुनीता रानी को मैदान में उतारा है। दो आजाद प्रत्याशियों सोनिया बोहत और रवि भान से उनका मुकाबला है।
- यमुनानगर-जगाधरी निगम में मेयर पद के लिए पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी सुमन बहमनी भाजपा की ओर से चुनावी रण में हैं। उनके मुकाबले कांग्रेस ने किरण देवी को मैदान में उतारा है। हालांकि मधु चाैधरी बताैर आजाद चुनाव लड़ रही हैं मगर बसपा, इनेलो और आप का समर्थन उनके साथ दिखता है। यहां भी मुकाबला रोचक है।
- रादाैर नगर निकाय में अध्यक्ष पद के लिए भाजपा से रजनीश मेहता का मुकाबला चार आजाद प्रत्याशी दलीप कुमार, अजय, मोहिंद्र पाल व सतविंद्र सिंह कर रहे हैं। यहां भी मुकाबला रोचक बताया जा रहा है।
- कैथल के सीवन निकाय चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए भाजपा की शैली मुंजाल के सामने आजाद प्रत्याशी हेमलता सैनी और संयम गोयल ताल ठोक रहे हैं। हेमलता को कांग्रेस का तो संयम को आप का समर्थन है।
- कलायत निकाय में अध्यक्ष पद के लिए भाजपा से मैनपाल राणा चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा से टिकट नहीं मिली तो राजू काैशिक व अंकित राणा बताैर आजाद मैदान में हैं। उधर जसविंद्र राणा आप की ओर से मुकाबले में हैं। चुनाव रोचक है, क्योंकि यहां राजपूत वोट बंटने की संभावना है और कलायत शहर में राजपूत बिरादरी का पूरा जोर है।
- पूंडरी निकाय के अध्यक्ष पद के लिए ममता सैनी बताैर भाजपा प्रत्याशी ताल ठोक रही हैं। टिकट नहीं मिला तो गुड्डी सैनी आजाद खड़ी हो गई हैं जबकि बबली गोस्वामी भी बताैर आजाद प्रत्याशी मैदान में हैं।
- कुरुक्षेत्र नगर परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए मुख्य मुकाबला भाजपा की माफी ढांडा और कांग्रेस की सुनीता नेहरा के बीच है। आप से रुक्मिणी और बसपा से राजबाला भी मैदान में हैं। टक्कर अच्छी है, क्योंकि यहां के वर्तमान विधायक कांग्रेस से अशोक अरोड़ा हैं जबकि भाजपा के लिए पूर्व मंत्री सुभाष सुधा जोर लगा रहे हैं।
- इस्माईलाबाद निकाय में अध्यक्ष पद के लिए भाजपा से मेधा बंसल का मुकाबला कांग्रेस समर्थित निशा से है। वर्ष 2022 में अपना निर्वाचित अध्यक्ष बनाने वाली आप इस बार मैदान में नहीं है।
बंदरों का उत्पात, बेसहारा पशु और एनडीसी रहे बड़ा मुद्दा
गली-मुहल्लों के चुनाव हैं, तो जाहिर है कि मुद्दे भी स्थानीय ही होंगे। इस बार सभी निकायों में जर्जर सड़कों और गंदगी के साथ-साथ बंदरों के उत्पात और बेसहारा पशु भी मुद्दा बने। प्रॉपर्टी आईडी की त्रुटियों और एनडीसी के लिए भटकाव, ये बड़ा मुद्दा रहा। जिसे लोगों ने भी उठाया और प्रतिद्वंद्वियों ने भी। इसके अलावा सीवरेज सिस्टम, कूड़े का अच्छे ढंग से निस्तारण, रोजाना डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन, करनाल स्मार्ट सिटी, निकाय स्तर पर काम करवाने के लिए भ्रष्टाचार, बारिश के पानी की निकासी, जर्जर नाले व नालियां, बदहाल पार्क, खेल मैदानों का अभाव, क्षेत्रों में नशे का बढ़ता नेटवर्क, स्ट्रीट लाइटों की कमी सरीखे स्थानीय मुद्दों पर ये चुनाव केंद्रित हैं। मतदाता आज इसी आस से वोट करेगा कि उनके चाैधरी उन्हें इन समस्याओं से निजात दिलवाएंगे।