प्रदेश के स्कूलों में लगीं बायोमेट्रिक मशीनें सफेद हाथी बन गई हैं। अध्यापकों की हाजिरी सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2011 में प्रदेश के सभी जिलों के हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में बायोमेट्रिक मशीनें लगाई थीं। भारी बजट से स्कूलों में लगाई गईं मशीनों का किसी प्रकार से प्रयोग नहीं हो रहा है।
स्कूल मुखिया और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अभी तक बायोमेट्रिक मशीन लगाने के उद्देश्य का भी पता नहीं है। केवल जानकारी के अनुसार ही अधिकारी बता रहे हैं कि स्कूलों में बायोमेट्रिक मशीनें अध्यापकों की मनमर्जी पर नकेल कसने के लिए लगाई गई हैं। इन मशीनों में अध्यापकों को सुबह व शाम को छुट्टी के समय अंगूठे से हाजिर लगानी होगी जिससे अध्यापकों के स्कूल में आने व छुट्टी के बाद जाने की जानकारी सीधे विभाग के पास होगी। जिले के कुछ स्कूलों में इन मशीनों में केवल लाइट ही जल रही है। आधे से अधिक स्कूलों में मशीनें खराब हो चुकी हैं।
बायोमेट्रिक मशीनें स्कूल के अध्यापकों के सही समय पर आने व जाने के लिए लगाई गई थीं। इसका मुख्य उद्देश्य अध्यापक के स्कूल पहुंचने पर हाजिरी लगाकर स्कूल में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाना था। मशीन के लगने के बाद अध्यापक को सुबह व शाम को अगूंठे से हाजिरी लगानी थी।
जांच होनी चाहिए : संघ
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के जिला सचिव सतबीर गोयत ने आशंका जताई कि बायोमेट्रिक मशीनों को लगाने में बड़े स्तर का घोटाला हो सकता है। शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी व नेताओं की मिलीभगत से पैसे को यहां-वहां खर्च किया जा रहा है। शिक्षा विभाग में बजट अधिक होने के कारण अधिकारी बिना सोचे ही करोड़ो रुपये लगा रहे हैं, जिसकी जांच होनी चाहिए, अगर कोई दोषी पाया जाता है तो सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
जानकारी देते हैं
उप जिला शिक्षा अधिकारी शमशेर सिरोही ने बताया कि जिले में बायोमेट्रिक मशीनें जो चल रहीं और जो खराब हो चुकी हैं। उसके लिए विभाग के अधिकारियों को प्रत्येक महीने जानकारी दी जा रही है। कई स्कूलों में ये मशीनें खराब हो चुकी हैं।