सग्गा गांव के शिव मंदिर में शिव महापुराण कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सग्गा गांव के शिव मंदिर में शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें कथा व्यास रसिक बिहारी महाराज ने कहा कि शिव महापुराण कथा श्रवण व शिव भक्ति के लिए पहले अहंकार दूर करना होगा। क्योंकि जब तक अहंकार होता है तब तक भोलेनाथ प्रसन्न नहीं होते हैं।
जिस प्रकार आदि देव महादेव को भोलेनाथ कहा जाता है उसी तरह उनको भक्त भी भोले पसंद हैं। जब तक अहंकार दूर नहीं होगा तब तक शिव की भक्ति प्राप्त होना कठिन है। शिव कथा सुनाते हुए महाराज जी ने कहा कि शिव और पार्वती के दो पुत्र हुए एक का नाम कार्तिकेय और दूसरे का नाम गणेश है। कार्तिकेय पुरुषार्थ का प्रतीक माना गया है। पुराणों में श्री गणेश की अनेक कथाएं प्राप्त होती हैं। एक कल्प में साक्षात श्रीकृष्ण उनके पुत्र बनते हैं दूसरे कल्प में पार्वती उनकी उत्पत्ति करती हैं।
एक कल्प में शनि की दृष्टि से सिर कटता है और दूसरे में स्वयं शिवजी सिर काटते हैं। माता के कोप से बचने के लिए हाथी का सिर जोड़ा जाता है। हाथी का सिर बड़ा होता है, लेकिन आंखें छोटी होती हैं। यह सूक्ष्म दृष्टि का प्रतीक है। हमारी दृष्टि सूक्ष्म होनी चाहिए। कान सूप के जैसे मानो फालतू बात गणेश नहीं सुनते। एक दांत अर्थात जो बात कह दिया उसमें अटल रहते हैं और लंबी नाक होना प्रतिष्ठा का प्रतीक है। कथा व्यास ने कहा कि जहां पर सूक्ष्म दृष्टि होती है। वहां विघ्न नहीं होता है और जहां विघ्न बाधा न हो, वहीं ऋद्धि-सिद्धि और शुभ लाभ का सदैव आगमन होता है। कथा समिति के सदस्य संजीव राणा ने बताया कि कथा 27 फरवरी तक प्रतिदिन दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक होगी। उसी दिन भंडारे का आयोजन किया जाएगा।