संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। रामलीला भवन में श्री रामायण पाठक सभा के कलाकारों ने रविवार की रात भरत मिलाप का मंचन किया। दिखाया कि श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बारे में पता चलता है तो भरत माता कैकई को भला-बुरा कहते हैं। कौशल्या के पास जाकर उनसे क्षमा मांगते हैं।
मंचन में दिखाया कि भरत कहते हैं कि वह राम को वन से वापिस लेकर आएंगे। उनके साथ कौशल्या, सुमित्रा व कैकई भी जाने की जिद करती हैं, तभी वह सारे एकत्रित होकर श्रीराम प्रभु को लेने के लिए अयोध्या जाते हैं। उधर वन में जाते हुए राम और लक्ष्मण की भेंट निषाद राज से होती है। वह उनको नदी पार करवाता है।
चित्रकूट में पहुंचकर लक्ष्मण जी भरत को आता हुआ देखकर श्री रामचंद्र जी को होशियार होने के लिए कहते हैं। तभी श्री रामचंद्र लक्ष्मण को समझाते हैं कि भरत जब रामचंद्र के पास आकर वापस अयोध्या चलने को कहते हैं तो वह मात-पिता की आज्ञा मानकर चलने से मना कर देते हैं। भरत कहते हैं कि भैया आप अपनी खड़ाऊ मुझे दीजिए, मैं इनको राजगद्दी पर रखकर राजकाज संभाल लूंगा। भरत प्रभु श्री राम की खड़ाऊ लेकर अयोध्या की ओर चले जाते हैं।
सभा के प्रधान रमेश चंद गुप्ता ने बताया कि 29 सितंबर को सीता हरण की लीला का मंचन किया जाएगा। सभा के चेयरमैन नरेश गुप्ता, महासचिव प्रभात गुप्ता, कोषाध्यक्ष मनोज गोयल, मुख्य निर्देशक रामकिशन गुप्ता और महाप्रबंधक रविंद्र बंसल के साथ अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।