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जीटी रोड स्थित टोल प्लाजा फ्री कर धरने पर डटे किसान

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नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने शुक्रवार सुबह 9.20 बजे दिल्ली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बसताड़ा के समीप स्थित टोल प्लाजा के बैरिकेड हटाकर फ्री कर दिया। साथ ही प्लाजा के समीप ही धरना शुरू कर दिया। इससे पहले भाकियू ने 25 दिसंबर से तीन दिनों तक टोल फ्री का ऐलान किया था।
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टोल टैक्स पर पानीपत से करनाल की ओर जाने वाली 13 लाइनें हैं, जिसमें पांच लाइनों पर किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रालियां और कारें अड़ा दी। शेष आठ लाइनों से वाहन गुजरते रहे। वहीं करनाल-पानीपत साइड से सभी सात लाइनें खुली रहीं। एहतियात के तौर पर मौके पर पुलिस बल तैनात रहा। महिलाएं और बच्चे भी किसान यूनियन का झंडा लेकर धरनास्थल पर पहुंचे। धरनास्थल पर रणनीति बनाई गई कि गांवों में भाजपा-जजपा नेताओं के बहिष्कार के लिए फ्लैक्स लगा दें। करनाल जिले में 21 गांवों में बहिष्कार के बैनर लग चुके हैं। शेष गांवों में आगामी रणनीति के तहत यह काम किया जाएगा। धरनास्थल के लिए सतपाल सिंह चहल को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। अजय सिंह राणा, गुरनाम सिंह, तेजपाल, सुखविंद्र सिंह कमेटी के सदस्य बनाए गए हैं।
सभी धर्म के लोग मिलकर लड़ रहे हक की लड़ाई : चढ़ूनी
भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढू़नी भी धरनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने देश को धर्म व जाति के नाम पर बांटने का काम किया है। आज सभी धर्म और जाति के लोग एकत्रित होकर हकों की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि धरना-प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से चलना चाहिए। किसी प्रकार अशांति नहीं होनी चाहिए और न ही किसी वाहन का नुकसान होना चाहिए, ताकि सरकार किसानों को गलत न ठहराए। तीन दिवसीय चलने वाले धरने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है।
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राजनीतिक दल समर्थन दें पर झंडा-बैनर का इस्तेमाल न करें
किसान नेता सतपाल चहल ने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल धरने को समर्थन दे सकता है, लेकिन झंडा या बैनर का इस्तेमाल नहीं कर सकता। किसान यह कानून चाहते हैं कि सरकार उनके अलग से कार्ड बना दे, जिससे उन्हें मंडी, मिल और एमएसपी की जरूरत न हो।
इनेलो नेता ने दिया समर्थन
ऐलनाबाद के विधायक एवं इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला दोपहर बाद करीब 3.50 बजे धरनास्थल पर पहुंचे और किसानों को समर्थन दिया। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार को तत्काल किसानों की मांग माननी चाहिए। किसानों को गलत ठहराना उचित नहीं है।
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