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बासमती की कीमत रिकार्ड स्तर पर

Thu, 07 Nov 2013 12:32 AM IST
करनाल
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बासमती की कीमत ने पिछले सभी रिकार्ड तोड़ दिए हैं।  मंडी में बासमती की लालकिला किस्म बुधवार को 5,771 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिकी।
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 मंगलवार को मुकाबले इसकी कीमत में लगभग दो सौ रुपये की बढ़ोतरी हुई। यही स्थिति पूसा-1121 के दामों में रही। जो चार हजार का आंकड़ा पार कर 4,141 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंचा। धान की इन किस्मों की कीमतों में आई तेजी से किसान के चेहरों पर तो रौनक आ गई है, लेकिन आढ़तियों के मन में लगातार डर बढ़ता जा रहा है। आढ़तियों को डर है कि यदि ऊंचे दामों पर धान खरीदने के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मंदी रही तो आढ़तियों का पैसा राइस मिलर्स के पास रुक जाएगा।

 धान की इन किस्मों में तेजी का एक बड़ा कारण यह भी माना जा रहा है कि अरब देशों में जहां सबसे ज्यादा चावल भारत से निर्यात होता है वहां की कुछ चावल खरीद एजेंसियों ने तरावड़ी के आसपास चावल तैयार करने के लिए राइस ले ली है और स्वयं कच्चे माल की खरीद शुरू कर दी है।
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इससे मार्केट में प्रतिस्पर्धा में बढ़ोतरी हुई है। मंगलवार तक बासमती जहां 5,561 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रही थी, वहीं पूसा-1121 धान चार हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा था। इस तरह से इन दोनों किस्मों के दामों में लगातार तेजी देखी जा रही है।

अब अगले दो-तीन दिन में भावों में दो सौ से पांच सौ रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आने की संभावना है। इसी संभावना को देखते हुए किसानों ने भी फसल को स्टॉक करना शुरू कर दिया है। इस वजह से मंडी में आवक पर भी असर पड़ रहा है।

विदेशी खरीदारों की पहली पसंद भारतीय चावल
तरावड़ी के चावल निर्यातक डबल चाबी ब्रांड चावल के मालिक पंकज गोयल ने दामों के बढ़ने पर कहा कि पिछले साल तक पाकिस्तान के चावल की मांग विदेशों में थी, लेकिन इस बार भारत के चावल विदेशी खरीदारों की पहली पसंद हैं। 

क्योंकि बासमती और पूसा-1121 धान दोनों की पकाई बेहतर है। सात से नौ एमएम की लंबाई और खुशबू के कारण यह किस्में विश्व में अपना एक अलग स्थान बना चुकी हैं।

चावल व्यापारी मलकीत सिंह का कहना है कि बासमती का हर साल लगातार घटता रकबा और विदेशों में बढ़ रही मांग के कारण बासमती धान के दामों में बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बासमती की कीमत छह हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकती है।
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उन्होंने बताया कि पहले केवल अरब देशों और यूरोप के एक या दो देशों में यहां का चावल जाता था, लेकिन इस बार यूरोप के दर्जनों देशों में निर्यात खुल गया है और वहां से भरपूर मांग आ रही है।
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