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देश को 1947 से पहले आजाद करा सकते थे बापू : कन्नू गांधी

Thu, 06 Feb 2014 10:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
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कुरुक्षेत्र। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी चमत्कारिक पुरुष थे। वे चाहते तो 1947 से पहले ही देश को आजाद करा सकते थे, लेकिन देश इस लायक नहीं था।
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अमर उजाला से विशेष बातचीत में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ज्येष्ठ पुत्र रामदास गांधी के बेटे कन्नू गांधी ने अपने दादा के साथ 16 बरस तक बिताए पलों को याद किया और देश के ताजा हालात पर चिंता व्यक्त की।

कन्नू गांधी ने कहा कि जब उनके दादा को नाथू राम गोडसे ने गोली मारी तो वे उस वक्त सेवाग्राम आश्रम वर्धा में थे। यह खबर उनके लिए सब कुछ छीन लेने जैसी थी। जाट धर्मशाला के कमरा नंबर 103 में बेड पर लेटे कन्नू गांधी ने बचपन के वे चित्र दिखाए, जिसमें बापू की लाठी पकड़कर वह जुहू चौपाटी पर टहल रहे हैं।
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कन्नू गांधी ने कहा कि बापू और मां कस्तूरबा मेरे बेहद करीब थे। जब बापू की हत्या हुई, उस समय मैं 16 बरस का था। घटना से मुझे तगड़ा झटका लगा, क्योंकि मेरे लिए यह यक्ष प्रश्न था कि ऐसे चमत्कारिक व्यक्ति की भी कोई हत्या कर सकता है।

बापू की सच्चाई और ईश्वर में गहरी आस्था थी। उनकी हत्या के बाद काफी समय मेरा मन नहीं लगा। इसके बाद मैं हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में पढ़ने के लिए चला गया।

कन्नू गांधी का कहना है कि बापू देश को 15 अगस्त 1947 से पहले ही आजाद करा सकते थे, लेकिन देश इस लायक नहीं था कि वह स्वतंत्र मुल्क की बागडोर संभाल सके। उन्होंने कहा कि बापू कहते थे, ‘आत्मिक शक्ति सबसे बड़ी ताकत है।’ बापू की यह बात हमेशा याद रहेगी।


बापू की चिता को दी थी अग्नि
बापू की गोली मार कर हत्या के अगले दिन 31 जनवरी 1948 को उनकी अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ा था। अंतिम संस्कार के समय उनका आखिरी दर्शन करने लोग उमड़ पड़े थे। बापू के ज्येष्ठ पुत्र रामदास गांधी और राजमोहन गांधी के साथ हमने भी उनकी चिता को अग्नि दी।

मेरे पिता रामदास गांधी नहीं, मोहन दास कर्मचंद गांधी
कन्नू गांधी कहते हैं कि मेरे पिता रामदास गांधी नहीं, बल्कि मोहन दास कर्मचंद गांधी हैं। रामदास गांधी की पत्नी का नाम क्या था मैं नहीं बताता, क्योंकि मेरी असली मां कस्तूरबा गांधी हैं।

गांधी के बहुचर्चित चित्र में कन्नू
समुद्र के किनारे बापू की लाठी को आगे से पकड़ कर सरपट चलता जो बालक राष्ट्रपिता की बहुचर्चित फोटो में से एक में दिखता है, वह कोई और नहीं कन्नू गांधी हैं। कन्नू आज भी इस फोटो को अपने सीने से चिपकाए रहते हैं। पलंग पर लेटे-लेटे उन्होंने जब यह चित्र दिखाया तो उनकी आंखों में एक अलग चमक दिख रही थी।
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बापू मुझे सैर और कसरत के लिए ले जाते थे
कन्नू गांधी ने बताया कि यह फोटो जुहू चौपाटी मुंबई की है। उन दिनों बापू मुंबई में बिड़ला हाउस में ठहरे थे। सुबह के वक्त मुझे कसरत और सैर के लिए जुहू चौपाटी ले जाते थे। हालांकि मैं कसरत और सैर से पीछे भागता था।

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