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फ्रॉड मामले में बैंक कर्मियों पर गिर सकती है गाज

Fri, 06 Dec 2013 11:57 PM IST
करनाल
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करनाल शहर के सिंडिकेट बैंक में उपभोक्ताओं से फ्रॉड होने का मामला गंभीर होता जा रहा है। उपभोक्ताओं के शक की सूई धोखाधड़ी करने के नाम पर एजेंट के साथ बैंक कर्मियों पर भी घूमने लगी है।
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कई उपभोक्ताओं ने बताया कि ऐसा फ्रॉड एक अकेला एजेंट नहीं कर सकता। अमर उजाला की ओर से बैंक में हुए फ्रॉड का मामला उजागर करने के बाद अन्य एजेंटों के भी होश उड़ गए हैं। वहीं, बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक सुरेंश नारंग ने जांच की बात कही है। उन्होंने कहा कि दोषी जो भी निकले, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

काफी एजेंट शुक्रवार को पूरा दिन बैंक की ऊपरी मंजिल में बैठे दिनभर खातों का मिलान करने में लगे रहे। सिंडिकेट बैंक मेें सीनियर प्रबंधक के पास शिकायत करने पहुंचे शहर के प्रेम नगर निवासी प्रमोद कुमार, सेक्टर-13 निवासी श्वेता के पति संदीप कुमार और कमल सचदेवा ने बताया कि उन लोगों के साथ लाखों रुपये का फ्रॉड किया जा चुका है। वे लोग बैंक के खिलाफ कडे़ नाराज दिखे।
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उन लोगों ने इस मामले में कार्रवाई नहीं होने की सूरत में बैक के बाहर तंबू लगा कर धरना देने तक की चेतावनी दे डाली है। इन लोगों ने कहा कि फ्रॉड बहुत लोगों के साथ हुआ है। वे लोग दीपक कथूरिया को बैंक का एजेंट होने के तौर पर जानते थे। उन्हें कुछ लेना देना नहीं। उन्हें तो अपने पैसे से मतलब है। वे लोग पैसा बैंक से लेंगे। एजेंट की मौत हो चुकी है।

ऐसी सूरत में समस्या का पूरा हल केवल और केवल बैंक के पास है। सोमवार तक कोई हल नहीं हुआ तो विरोध शुरू कर दिया जाएगा। बैंक अधिकारियों की भी इस मामले में जांच कराई जानी चाहिए। वर्तमान प्रबंधक को आए दो-तीन दिन हुए हैं। वे लोगों से शिकायत ले रहे हैं।

प्रमोद कुमार ने बताया कि उनके खाते में एक लाख 21 हजार 600 रुपये जमा होने चाहिए थे लेकिन खाते में मात्र 54 हजार रुपये जमा है। एजेंट दीपक कथूरिया 25 साल से उनके पास आ रहे थे। उधर, श्वेता के पति संदीप कुमार ने बताया कि उनका पैसा 72 हजार होना चाहिए था लेकिन खाते में केवल 21 हजार जमा हैं।

कमल सचदेवा ने कहा कि उनके पिता बिशनदास के पास एजेंट दीपक कथूरिया पिछले 32 साल से आ रहे थे। दस रुपये से खाता शुरू किया था। इस मामले में शिकायत करने वाले लोगों की संख्या बढ़नेे लगी है। शहर के कई क्षेत्रों के लोग अब बैंक पहुंच रहे हैं।

पूरा दिन शिकायत करने वाले लोगों का तांता लगा रहा। दो आ रहे तो चार वापस जा रहे का सिलसिला जारी रहा। एजेंट दीपक कथूरिया ने साढे़ तीन सौ खाताधारकों का लगभग डेढ़ करोड़ रुपया बैंक में जमा करवा रखा है। माना जा रहा है डेढ़ सौ से दो खाताधारकों के साथ फ्रॉड हुआ है। पूरा मामला जांच के साथ ही साफ होगा।

अधिकारी फंसे चाहे कर्मी, जांच होगी
बैंक के उच्च अधिकारियों के नोटिस में पूरा मामला लाया गया है। उच्चाधिकारियों ने मामले को पूरी गंभीरता से लिया है। हर पल की खबर अधिकारी ले रहे हैं। दीपक कथूरिया के माध्यम से बैंक में 355 खाते चल रहे हैं। जिन लोगों के पास रसीद है, उनको पैसा दिया जाएगा।

पूरे मामले की जांच होगी। बैंक अधिकारी हो या कर्मी, एजेंट हो या कोई ओर, पूरा मामला साफ किया जाएगा। शिकायत करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। अभी तक 20 से तीस लोगों की शिकायत उनके पास पहुंच चुकी हैं।
सुरेश नारंग, वरिष्ठ प्रबंधक, सिंडिकेट बैंक, करनाल

ग्रामीणों ने मुख्य अध्यापक के खिलाफ काटा बवाल
घरौंडा के गांव अलीपुर खालसा के राजकीय उच्च विद्यालय में विद्यार्थियों के साथ अभद्र व्यवहार करने पर बच्चों के परिजनों व छात्र-छात्राओं का मुख्य अध्यापक के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने स्कूल के मुख्य गेट पर मुख्य अध्यापक के खिलाफ जमकर हंगामा करते हुए नारेबाजी की।

विद्यार्थियों व उनके परिजनों ने विभागीय उच्चाधिकारियों से मुख्य अध्यापक की लिखित शिकायत करके तबादले की मांग की है। स्कूल के अन्य अध्यापकों ने ग्रामीणों को आगे से इस प्रकार की कोताही नहीं होने का आश्वासन देकर शांत किया।

हंगामा कर रहे लोगों ने बताया कि शुक्रवार को सुबह जब अलीपुर खालसा के राजकीय उच्च विद्यालय के बच्चे मैदान में खेल रहे थे तो मुख्य अध्यापक ने उनको खेलने से रोका। जब बच्चे नहीं माने तो उन्होंने गालियां देनी शुरू कर दी। बच्चाें ने अपने परिजनों को यह बात बताई तो परिजन भी स्कूल में पहुंच गए और हेड मास्टर से बात की तो उनके साथ भी मुख्य अध्यापक अभद्र व्यवहार करने पर उतारू हो गए।

हेडमास्टर की ओर से बदतमीजी करने के बाद परेशान विद्यार्थियों ने स्कूल के गेट पर बैठकर हेडमास्टर के खिलाफ नारेबाजी की और उच्चाधिकारियों से उनकी शिकायत कर तबादले की मांग की। छात्रा नेहा, छात्र देवेंद्र, नीरज, सुनील, अंकित ने बताया कि मुख्य अध्यापक को स्कूल में आए डेढ़ महीना हो चुका है और वे न तो कक्षा में बच्चों को पढ़ाते हैं और न ही अन्य खेल गतिविधियों में भाग लेने देते हैं।

बच्चों को समझाने की जगह अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। चाहे छात्र हो या छात्रा, सबके साथ एक समान व्यवहार करते हैं। छात्राओं को गालियां देते हैं। वहीं, छात्रों के परिजन सुभाष शर्मा, प्रदीप व भतेरी देवी ने बताया कि वे बच्चों की शिकायत पर मुख्याध्यापक से मिले लेकिन उन्होंने उनके साथ भी बदतमीजी की।

जब से इस मुख्याध्यापक ने पदभार संभाला है, उसी समय से स्कूल का माहौल खराब हो गया है। अनुशासन नाम की कोई चीज नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि शीघ्र से शीघ्र मुख्याध्यापक का तबादला नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।

किसी से नहीं की बदतमीजी
मुख्य अध्यापक राममेहर सिंह ने बताया कि उन्होंने किसी भी छात्र से कोई भी बदतमीजी नहीं की है। सभी आरोपों को निराधार बताते हुए उन्होंने कहा कि बच्चे सुबह लगभग आठ बजे मैदान में खेल रहे थे।

लगभग आधे घंटे के बाद छात्राओं के आने के बाद बच्चों को खेलने से मना कर दिया, जिससे छात्र भड़क गए और उन्होंने इस मामले की सूचना अपने परिजनों को दी। परिजनों ने आकर बच्चों के साथ स्कूल में जमकर हंगामा किया।
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