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दयाल सिंह स्कूल में दाखिले पर रोक

Wed, 10 Feb 2016 01:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
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 सेकेडंरी एजुकेशन के डायरेक्टर एमएल कौशिक ने स्कूल की एनओसी विड्रा करने के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही यह भी आदेश दिए हैं कि नए शिक्षा सत्र एक अप्रैल, 2016 से स्कूल में कोई भी नया दाखिला न किया जाए। उधर, अभिभावक एकता मंच ने इसे सच्चाई की जीत करार दिया है। दूसरी ओर स्कूल में पढ़ रहे करीब 2500 बच्चों के भविष्य पर भी संशय हो गया है आखिर आगे क्या होगा? मामले को लेकर दयाल सिंह स्कूल प्रबंधन ने चुप्पी साध ली है।
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गौरतलब है कि पिछले दो साल से अभिभावक एकता मंच स्कूल के खिलाफ आवाज उठा रहा है। मंच शुरू से ही आरोप लगाता रहा है कि स्कूल हर बार फीस बढ़ा जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है।

वर्ष 2015 में बढ़ी हुई फीस नहीं देने पर आठ बच्चों के नाम काट दिए गए व दो माह तक उन्हें स्कूल में नहीं घुसने दिया गया। आखिरकार अभिभावक हाईकोर्ट की शरण में गए तो बच्चों को वापस स्कूल में लिया गया। इस पूरे मामले को लेकर अभिभावक एकता मंच ने रोहतक कमिशनर, सीबीएसई और शिक्षा निदेशक हरियाणा को शिकायत की थी। बकायदा जांच के लिए अलग अलग टीमें स्कूल में पहुंची थी और पीड़ित बच्चों से बातचीत के बाद उनकी वीडियोग्राफी भी की गई थी। सरकार की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी करनाल को मामले की जांच के लिए कहा गया तो डीईओ ने अपनी रिपोर्ट सरकार को दी। स्कूल प्रबंधन की तरफ से अलग-अलग मामलों में मांग गया रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया और न ही कोई ठोस जवाब दिया गया।
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स्कूल की जांच डीसी करनाल, आयुक्त रोहतक के साथ बीईओ और डीईओ ने भी तो सभी ने अपनी जांच में स्कूल में ली जा रही फीस को गलत बताया और नियमों के खिलाफ करार दिया। करीब दो साल तक चले इस विवाद में आखिरकार सेकेंडरी एजुकेशन के निदेशक एमएल कौशिक ने दयाल सिंह स्कूल सेक्टर 7 को दी गई अपनी एनओसी को विड्रा करने के आदेश दिए, ऐसे में 1 अप्रैल 2016 से स्कूल की मान्यता रद्द हो जाएगी, क्योंकि प्रदेश में कोई भी स्कूल चलाने से पहले हरियाणा सरकार की तरफ से एनओसी लेनी होती है, चाहे वह स्कूल किसी भी बोर्ड से संबंधित हो। निदेशक ने अपने आदेशों में साफ लिया है कि सरकार की नियमों को अनुपालना नहीं होने के कारण आगामी 1 अप्रैल, 2016 से इस स्कूल मेें कोई भी नया दाखिला न लिया जाए। निदेशक ने अपने आदेश की प्रति संबंधित स्कूल, डीईओ करनाल और भिवानी बोर्ड के सचिव को भी भेजी है।

बैलेंस सीट में 2 करोड़ 30 लाख
अभिभावक एकता मंच की ओर से निदेशक के पास स्कूल के ऐसे तथ्य पेश किए गए, जो नियमों के खिलाफ हैं। निदेशक ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि स्कूल नो प्रोफिट, नो लॉस पर चलता है और स्कूल के पैसे का दूसरे स्थान पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है, जबकि वर्ष 1012 में स्कूल की बैलेंस सीट में से 81,11,210 रुपये ट्रस्ट को ट्रांसफर किए गए हैं, जबकि यह नियमों के खिलाफ है। इसके अलावा, 2013 की बैलेंस सीट में 2,30,86,196 रुपये सरप्लस पाए गए। यह भी नियम है कि जब पैसे सरप्लस हों तो स्कूल फीस नहीं बढ़ा सकता है। बावजूद इसके स्कूल ने फीस बढ़ाई और अभिभावकों पर ज्यादा फीस देने का दबाव बनाया। वर्ष 2014 में करनाल डीईओ द्वारा फीस नहीं बढ़ाने के निर्देश दिए गए, पर स्कूल प्रबंधन ने इन आदेशों को दरकिनार कर दिया। इसके अलावा, अधिक फीस लेने की विभाग के पास 24 शिकायतें पहुंची।

मनमानी करने वाले स्कूलों के खिलाफ खोला जाएगा मोर्चा
दो साल तक स्कूल के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले अभिभावक एकता मंच के प्रधान दिनेश नरूला ने कहा कि यह सब अभिभावकों की जीत है। हम सच्चाई की लड़ाई लड़ रहे हैं। अब शहर में मनमानी करने वाले दूसरे स्कूलों के खिलाफ लड़ाई लड़ी जाएगी और नियमों के खिलाफ चल रहे स्कूलों की पोल खोली जाएगी। हमारा प्रयास है कि अभिभावकों की जेब न कटें, इसलिए अभिभावकों को स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। वहीं, मंच के महासचिव नवीन अग्रवाल ने बताया कि हमेशा सच्चाई की जीत होती है। फैसले से हमें संतुष्टि मिली है, क्योंकि बच्चों से नाजाजायज तौर पर फीस वसूली गई थी। 

प्रशासन स्कूल को करे टेकओवर
अभिभावक एकता मंच ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि जिला प्रशासन इस स्कूल को टेकओवर करे, ताकि करीब 2500 बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहे। बता दें कि निदेशालय के फैसले के बाद स्टूडेंट्स और उनके अभिभावकों की चिंता बढ़ गई हैं। मंच के सदस्यों ने साफ किया है कि निदेशालय ने एक अप्रैल, 2016 से एनओसी विड्रा करने के आदेश दिए हैं, ऐसे में पहली से 12वीं कक्षा तक में पढ़ने वाले स्डूेंट्स पर इसका कोई असर नहीं होगा। हालांकि, नया दाखिला कोई नहीं हो सकेगा। मंच के प्रधान दिनेश नरूला ने बताया कि हमारी कोशिश होगी कि स्कूल को प्रशासन टेकओवर करे, ताकि बच्चों की पढ़ाई जारी रह सके।
स्कूल को अतिरिक्त फीस वापस लौटाने के दिए थे निर्देश
 शिक्षा निदेशालय ने विद्यार्थियों से नियमों के विरुद्ध फीस लेने के मामले में दयाल सिंह पब्लिक स्कूल सेक्टर-7 की नए सेशन-2016 से एनओसी वापस लेने के निर्देश दिए हैं। लेकिन स्कूल प्रबंधन द्वारा विभाग के निर्देशों की अवहेलना करते हुए फीस के रुपये वापस नहीं लौटाए थे। इस पर शिक्षा निदेशालय द्वारा नए सेशन से एनओसी वापस लेने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

अभिभावक एकता संघ द्वारा स्कूल पर नियमों के विरूद्धा फीस लेने के साथ ही दोहरी एडमिशन फीस लेने का भी आरोप है। नियम के मुताबिक स्कूलों एडमिशन फीस केवल पहली, छठी, नौंवी व 12वीं कक्षा के छात्रों से ली जानी चाहिए। लेकिन अभिभावक एकता संघ का आरोप है कि स्कूल द्वारा प्रत्येक वर्ष उनसे छात्रों की एडमिशन फीस ली जा रही हैं। इसके अलावा स्कूल द्वारा स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर शिक्षा व भवन निर्माण संबंधित चार्ज भी वसूले गए हैं। जिसका प्रमाण स्कूल की बैलेंस शीट में पड़े 2.31 करोड़ रुपये हैं।

छात्रों से अवैध रूप से वसूली की गई फीस व शिक्षा विभाग के निर्देशों की अवहेलना के कारण शिक्षा निदेशालय ने सख्ती से पेश आते हुए स्कूल से एनओसी वापस लेने के निर्देश जारी कर दिए हैं तथा अगले स्तर से स्कूल में एडमिशन न होने की भी बात कही है।
इस स्कूल में एडमिशन के लिए लगती हैं लंबी लाइनें
यह स्कूल जिले का सबसे प्रतिष्ठित स्कूल है। इसमें दाखिले के लिए लंबी लाइने लगती हैं। जिले के जितने भी उद्योगपति व हाई प्रोफाईल फेमिली हैं, अपने बच्चों की पढाई के लिए इन सभी का पहली पसंद दयाल सिंह पब्लिक स्कू ल होता है। ऐसे में दिसंबर से ही लोग एडमिशन को लेकर स्कूल के चक्कर काटना शुरू कर देते हैं। स्कूलों में बच्चों का एडमिशन टेस्ट व साक्षात्कार के बाद होता है।
वर्जन
मैं इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती।
नीना राय, प्रिंसिपल, सेक्टर-7
वर्जन
जो भी नियमों के खिलाफ काम करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दयाल सिंह पब्लिक स्कूल, सेक्टर-7 करनाल की रिपोर्ट में कई खामियां पाई गई हैं। नियमों पर खरा नहीं उतरने के कारण स्कूल से एनओसी विड्रा की गई है और आगामी शिक्षा सत्र में नए दाखिले पर भी रोक लगाई है।
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एमएल कौशिक, निदेशक, सेकेंडरी एजुकेशन, हरियाणा।
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