कुरुक्षेत्र जिले में ढ़ांड रोड पर मिर्जापुर गांव के पास भाखड़ा नहर में होंडा सिटी कार के गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी, बेटी और बेटा घायल हो गए।
पुलिस और आसपास के लोगों ने क्रेन की मदद से काफी मशक्कत को कार को नहर से निकाला। यह परिवार मुलाना के एक स्कूल से पैरेंट्स मीटिंग के बाद अपने गांव हेबदपुर लौट रहा था।
करनाल जिला के हेबदपुर गांव निवासी जगदीप सिंह ने बताया कि उनके भाई गुरजीत सिंह अपनी पत्नी मनजीत कौर, बेटी पवनदीप कौर और पुत्र यादवेंद्र सिंह के साथ शनिवार को मुलाना स्कूल में पैरेंट्स मीटिंग के लिए निकले थे। इस दौरान वे किसी काम से कुरुक्षेत्र भी गए।
घटना स्थल पर मौजूद पबनावा निवासी सुनील और ईश्वर सिंह ने बताया कि वह सड़क से गुजर रहे थे कि इस दौरान एक हाेंडा सिटी कार नहर में गिर गई। कार में सवार बच्चे चिल्ला रहे थे। इसे देखते हुए वे नहर में कूद गए।
दो बच्चों और एक महिला को नहर से बाहर निकालकर सरकारी अस्पताल में भेज दिया और पुलिस को हादसे की सूचना दे दी। पुलिस ने क्रेन की मदद से दो घंटे की मशक्कत के बाद कार को नहर से बाहर निकाला। गुरजीत सिंह का शव भी कार में ही फंसा हुआ था।
डीएसपी निर्मल सिंह ने बताया कि गुरजीत सिंह भाखड़ा नहर की पटरी के पास स्थित एक गांव में किसी व्यक्ति से पैसे लेने के लिए गए थे। नहर की पटरी से जब वे वापस ढांड रोड पर आने लगे तो बैक करते समय गाड़ी नहर में जा गिरी। डीएसपी के मुताबिक शायद कार का संतुलन बिगड़ने से यह हादसा हुआ है।
एसडीएम अशोक बांसल, बीडीपीओ प्रताप सिंह, डीएसपी निर्मल सिंह और केयू थाना प्रभारी नरेंद्र कुमार भी पुलिस कर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।
जान हथेली पर रखकर की मदद
कार को नहर में गिरता देख वहां से गुजर रहे राहगीर ईश्वर और सुनील ने अपनी जान की चिंता किए बिना पानी में कूद पडे़ और महिला व बच्चों को बाहर निकाला। इसके बाद प्रगट सिंह ने नहर में कूदकर कार का पता लगाया और क्रेन कुंडे को कार से बांधकर उसे बाहर निकालने में सहायता की।
पहले आढ़ती की दुकान और अब करता था खेती
जगदीप ने बताया कि उसका भाई गुरजीत सिंह पहले आढ़ती की दुकान करता था, लेकिन अब गांव में खेती का कार्य करता है। शनिवार को अपनी बेटी के स्कूल में पैरेंट्स मीटिंग के लिए पूरे परिवार के साथ मुलाना निकला था।
नहीं पहुंचे सरकारी गोताखोर और बोट
डीएसपी निर्मल सिंह ने घटना की सूचना तुरंत अधिकारियों को दे दी थी, लेकिन पूरे घटनाक्रम के दौरान न तो सरकारी गोताखोर मौके पर पहुंचे और न ही सरकारी बोट नहर पर पहुंचाई गई। गांव के कुछ गोताखोरों ने समाज सेवा करते हुए कार को बाहर निकाला और कार को ढूंढने में पुलिस की सहायता की।