माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। आयुष्मान कार्ड धारकों को शुक्रवार को परेशानी हुई। सुबह से सर्वर डाउन होने के कारण 100 से अधिक मरीजों का इलाज अटक गया। निजी और सिविल अस्पतालों में ऑपरेशन टालने पड़े। इमरजेंसी में आए मरीजों को नकद भुगतान कर उपचार कराना पड़ा। शाम के समय सर्वर सही होने के बाद ही स्थिति सामान्य हो सकी।
जिले में 3,46,331 आयुष्मान कार्ड धारक मौजूद हैं। शुक्रवार को सुबह से ही सिविल अस्पताल में आयुष्मान कार्डधारकों की कतार लगनी शुरू हो गईं। जैसे ही प्रक्रिया आगे बढ़ी, सर्वर ने काम करना बंद कर दिया। ऐसा ही निजी अस्पतालों में हुआ। अस्पतालकर्मियों ने कई बार लॉगिन करने की कोशिश की लेकिन हर बार तकनीकी खामी सामने आई। आयुष्मान के तहत होने वाली सभी सेवाएं ठप हो गईं। अकेले सिविल अस्पताल में 40 से अधिक मरीज इस परेशानी से प्रभावित हुए। सर्वर ठप होने का सबसे बड़ा असर उन मरीजों पर पड़ा जिनके ऑपरेशन पहले से तय थे। कई अस्पतालों में निर्धारित सर्जरी को टालना पड़ा।
इमरजेंसी सेवाओं में आए मरीजों को सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ा। समय पर इलाज जरूरी होने के कारण कई मरीजों को नकद भुगतान करना पड़ा। लगभग पूरे दिन की परेशानी के बाद शाम को सर्वर ठीक हुआ।
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केस-1
ऑपरेशन टला, दर्द के साथ घर लौटे रमेश
इंद्री क्षेत्र के रमेश का पित्ताशय का ऑपरेशन तय था। वह सुबह परिवार के साथ अस्पताल पहुंचे लेकिन सर्वर डाउन होने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। घंटों इंतजार के बाद उन्हें बिना ऑपरेशन के ही वापस लौटना पड़ा। उन्होंने बताया कि दो हफ्ते से तैयारी कर रहे थे लेकिन आज खाली हाथ लौटना पड़ा।
केस-2
इमरजेंसी में देना पड़ा नगद, कर्ज लेने की नौबत
तरावड़ी की सुनीता को अचानक तबीयत बिगड़ने पर निजी अस्पताल लाया गया। आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद सर्वर बंद होने से उनका कैशलेस इलाज नहीं हो सका। मजबूरी में परिजनों को नगद भुगतान करना पड़ा। कार्ड होते हुए भी पैसे देने पड़े, अब उधार लेकर खर्च पूरा करना पड़ा। अस्पताल वालों ने कहा कि बाद में पैसा मिल जाएगा।
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वर्जन :
आयुष्मान कार्ड का सर्वर डाउन होने की जानकारी मिली थी। सर्वे के काम चलने के कारण यह हुआ है। शाम तक बहाली हो गई थी। जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना 70-80 मरीजों का उपचार आयुष्मान योजना के तहत होता है। - डॉ. पूनम चौधरी, सीएमओ, करनाल