करनाल। आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों में 11 बड़ी सर्जरियां बंद होने के बाद मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रोकी गई हड्डी रोग की छह बड़ी सर्जरियों के बाद नागरिक अस्पताल में मरीजों का दबाव करीब 10 गुना तक बढ़ गया है। पहले जहां घुटना और कुल्हा प्रत्यारोपण की सर्जरी के लिए 10 से 12 दिन में तारीख मिल जाती थी, वहीं अब मरीजों को एक से डेढ़ महीने तक इंतजार करना पड़ेगा। जिले के 50 निजी आयुष्मान पैनल से जुड़े अस्पतालों में भी अब ये ऑपरेशन नहीं हो रहे, जिससे मरीजों को इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
आयुष्मान योजना के तहत रोकी गई 11 सर्जरियों में हड्डी ऑपरेशन में घुटना रिप्लस्मेंट, घुटना प्रत्यारोपण, सीमेंटयुक्त कुल्हा प्रत्यारोपण, बिना सीमेंट वाला कुल्हा प्रत्यारोपण, मिश्रित कुल्हा प्रत्यारोपण और कुल्हा प्रत्यारोपण जैसी छह बड़ी सर्जरियां शामिल हैं। इधर, नागरिक अस्पताल की स्थिति देखें तो इन सर्जरी को करने के लिए अस्पताल में एक ही डॉक्टर है। ऐसे में मरीजों का यहां दर्द जल्दी कम नहीं हो पाएगा।
वहीं जहां अस्पताल में घुटना रिप्लेसमेंट का महीने में एक मरीज आता था अब दो दिन से रोजाना 4 से 5 मरीज आ चुके हैं। डॉक्टरों के अनुसार, यह महंगी और जटिल मानी जाती हैं। आयुष्मान में यह सर्जरी नि:शुल्क हो जाती थी। नागरिक अस्पताल में तीन हड्डी रोग विशेषज्ञ है। इनमें एक मुख्य सर्जन हैं। अन्य एक डॉक्टर अक्तूबर में ही मार्च 2026 तक डेपूटेशन पर मधुबन ड्यूटी पर हैं। साथ ही एक अन्य डॉक्टर है वे सर्जन को केवल सहायक के तौर पर सहयोग दे रहे हैं। अकेले सर्जरी नहीं कर सकते हैं। संवाद
सर्जरी में तीन लाख रुपये तक आता है खर्च
आईएमए प्रधान डॉ. दीपक प्रकाश का कहना है कि इन सर्जरियों पर आमतौर पर अगर गैर आयुष्मान कार्डधारक अपना ऑपरेशन कराए तो करीब डेढ़ से तीन लाख रुपये तक में सर्जरी होती है, जो पहले आयुष्मान योजना से कवर कर रहे थे। अब योजना से हटने के बाद सरकारी अस्पताल में वेटिंग मिलने के कारण मरीज को पूरा खर्च खुद ही उठाना पड़ेगा।
केस-1
पहले बीपी के कारण नहीं हो पाया ऑपरेशन
घरौंडा से घुटने की रिप्लेसमेंट के ऑपरेशन के लिए एक निजी अस्पताल में पहुंची महिला कैलाशो देवी ने बताया पिछले 4 साल से दर्द से जूझ रही थी। एक महीने पहले ऑपरेशन कराने के लिए अस्पताल गई तो बीपी बढ़ा मिला तो डॉक्टर ने कुछ समय बाद की तारीख दे दी थी लेकिन अब दोबारा आई तो बोले कि ऑपरेशन नहीं कर सकते सरकारी में जाओ। उन्होंने कहा कि मैं इस बात से अंजान थी कि आयुष्मान योजना में ये सर्जरी रोक दी गई।
केस-2
एक माह की तारीख मिली, इलाज के लिए रुपये नहीं
रविंद्र ने बताया कि सड़क हादसे में कुल्हे की हड्डी टूटने के बाद तुरंत निजी अस्पताल पहुंचा था लेकिन अब यह सर्जरी योजना में शामिल नहीं है और आमदनी इतनी नहीं है कि अब निजी में पैसे देकर सर्जरी करवा सकूं। अस्पताल में जानकारी लेने पर पता चला कि वहां ऑपरेशन की तारीख एक महीने बाद की होगी। वहीं, निजी में करीब डेढ़ लाख रुपये का खर्च बताया गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह भी इलाज करवाने में असमर्थ हूं।
-टीकेआर या टीएचआर सर्जरी कोई आपात सर्जरी नहीं है और कभी भी की जा सकती है। वहीं, अगर कोई मरीज आपात स्थिति में भी आता है तो उसकी सर्जरी तत्काल भाव से कर रहे हैं। हालांकि अभी कई मरीजों को आयुष्मान योजना में इन सर्जरियों के बंद होने की जानकारी भी नहीं है इसलिए मरीजों की संख्या इतनी नहीं है। वहीं, पहले के मुकाबले दो दिन में टीकेआर और टीएचआर के तीन से चार मरीज आए हैं जो पहले महीने में मुश्किल से एक ही आता था। - डॉ. सौरभ, हड्डी रोग विशेषज्ञ व सर्जन, जिला नागरिक अस्पताल
सर्जरी सर्जरी का समय भर्ती रिकवरी समय
टोटल नी रिप्लेसमेंट- करीब 3 घंटे 5 से 7 दिन 2 से 3 महीने
रिविजन नी रिप्लेसमेंट- करीब 4 घंटे 7 से 10 दिन करीब 3 महीने
सीमेंटेड हिप रिप्लेसमेंट- करीब 2 घंटे 5 से 6 दिन 2 से 3 महीने
सीमेंटलेस हिप रिप्लेसमेंट- करीब 3 घंटे 6 से 10 दिन करीब 3 महीने
हाइब्रिड हिप रिप्लेसमेंट- करीब 3 घंटे 5 से 7 दिन 2 से 3 महीने
रिविजन हिप रिप्लेसमेंट- करीब 4 घंटे करीब 10 दिन 3 से 4 महीने