- बकाया भुगतान सहित अन्य मांगों के समर्थन में आईएमए की ओर से पांच जुलाई तक बंद किया गया है इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। आयुष्मान पैनल से जुड़े जिले के 47 निजी अस्पतालों में एक जुलाई को आयुष्मान कार्ड धारकों को इलाज नहीं मिला। यह सुविधा मरीजों को पांच जुलाई तक नहीं मिलेगी। ऐसे में मरीजों अपना इलाज करवाने के लिए जिले में 25 आयुष्मान पैनल से जुड़े सरकारी अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा।
आयुष्मान पैनल से जुड़े निजी अस्पतालों के आयुष्मान कार्ड धारकों के इलाज के लगभग 18 करोड़ रुपये सरकार की तरफ अटके हुए हैं। ऐसे में उनका भुगतान न होने व मुख्य मांग पूरी न होने के चलते इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने पूर्ण हड़ताल की है। इसको लेकर आईएमए करनाल ने जिला प्रधान सदाना की अध्यक्षता में 25 जून को ज्ञापन सौंपा था। जिसमें बकाया राशि का जल्द भुगतान करने और अन्य मुख्य मांगें मानने के लिए प्रदेश सरकार से गुहार लगाई गई थी। जिसके बाद 30 जून की देर रात तक चली बैठक में सरकार व आईएमए की राज्य स्तरीय कमेटी की बात नहीं बन सकी। जिसके चलते सोमवार को ओपीडी से लेकर ऑपरेशन तक बंद रखकर रोष जताया गया।
अब आईएमए कमेटी की सरकार के साथ पांच जुलाई को बैठक होगी। जिसके बाद हड़ताल आगे बढ़ाने या रद्द करने पर विचार किया जाएगा। रोजाना निजी अस्पतालों में 150 से 200 के बीच आयुष्मान कार्ड धारक इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। वहीं आयुष्मान कार्ड धारकों का आंकड़ा देखा जाए तो यह साढ़े सात लाख के पार है।
ये हैं मुख्य मांगें-
- समय पर भुगतान हो और एमओयू की शर्तों के अनुसार जारी किया जाए, जिसमें देरी के लिए एक फीसदी दंडात्मक ब्याज हो।
- पूर्व स्वीकृति के बाद कटौती और अस्वीकृतियों को रोका जाए।
- टीएमएस-2 पोर्टल में तकनीकी समस्याओं का समाधान या पहले कार्यात्मक टीएमसी-1 की वापसी हो।
- हरियाणा में एचबीपी-2022 पैकेजों के कार्यान्वयन को शीघ्र किया जाए।
- दस्तावेजीकरण आवश्यकताओं को सरल बनाया जाए ताकि वे बाधा न बनें।
- जुर्माने लगाने की नीतियों को और तार्किक बनाया जाए।
- जांच अधिकारियों और कर्मचारियों का व्यक्तिगत उत्पीड़न रोका जाए।
आईएमए की राज्य स्तरीय कमेटी के निर्णय पर पूरे प्रदेश सहित करनाल के आयुष्मान पैनल से जुड़े अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज बंद कर दिया गया है। यह इलाज पांच जुलाई तक बंद रहेगा। पांच जुलाई को राज्य कमेटी की प्रदेश सरकार के साथ बैठक होगी। जिसमें मांगें मान लेने पर ही मरीजों का इलाज शुरू किया जाएगा अन्यथा ऐसे ही इलाज बंद रहेगा।
- डॉ. रोहित सदाना, जिला प्रधान, आईएमए, करनाल