करनाल। पहला मौका है जब देश में आयुर्वेद दिवस मनाया जाएगा। 23 सितंबर (आज) को पूरे देश में लोग यह दिवस मनाएंगे। करनाल में आयुर्वेद दवाखानों का लगातार विस्तार हो रहा है। इस साल एलोपैथिक चिकित्सा वाले 26 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में भी आयुर्वेदिक चिकित्सकों की नियुक्ति करके वहां आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाएं शुरू की गई हैं। जिले में आयुर्वेद के 30 दवाखाने हैं।
जिला आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. सतपाल ने बताया कि भगवान धन्वंतरि की जयंती को धनतेरस के रूप में मनाया जाता था, जो हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को आती है। भगवान धन्वंतरि को स्वास्थ्य और चिकित्सा का देवता माना जाता है। देश में लंबे समय से आयुर्वेद दिवस मनाया जाता रहा है, हालांकि देश में सरकारी तौर पर वर्ष 2016 में इसे मनाना शुरू किया गया था।
अब प्रधानमंत्री की पहल पर आयुर्वेद दिवस को एक तिथि मिली है, 23 सितंबर। यह तिथि खगोल विज्ञान पर आधारित है। इस दिन दिन व रात बराबर होंगे। जिसका मानव शरीर पर सीधा प्रभाव देखा जाता है। यही कारण ही इस बार आयुर्वेद दिवस की थीम ‘मानव व ग्रह के लिए आयुर्वेद’ रखी गई है।
डॉ. सतपाल ने बताया कि जिले में 28 आयुर्वेदिक व दो यूनानी डिस्पेंसरी संचालित हैं। इसके साथ ही हाल ही में जिले के 26 पीएचसी व सीएचसी, जो एलोपैथिक चिकित्सालय हैं, में भी आयुर्वेदिक उपचार की सुविधा शुरू की गई है। इन सभी पीएचसी व सीएचसी में एक-एक आयुर्वेद चिकित्सक की नियुक्ति कर दी गई हैं। एक-एक फार्मासिस्ट व योग प्रशिक्षक भी नियुक्त हैं। कई में होम्योपैथिक चिकित्सक भी नियुक्त किए गए हैं। करनाल में पंचकर्म केंद्र भी स्थापित किया गया है, जहां बिना पेन किलर और बिना ऑपरेशन के जोड़ों के दर्द का उपचार किया जा रहा है।