समालखा। नई जैन स्थानक में सोमवार को उपेंद्र मुनि ने मोहभंग कर ईश्वर की प्राप्ति पर प्रवचन दिया। मुनि ने बताया कि मोह से भी वैराग्य पैदा होता है खासकर जब कोई व्यक्ति मोह की सीमाओं और दुखों को गहराई से महसूस करता है। मोह की अधिकता या अनचाहे परिणाम व्यक्ति को संसार से मोहभंग की ओर ले जाते हैं जिससे वैराग्य की भावना उत्पन्न होती है। सच्चा वैराग्य तब होता है जब मोह खत्म हो जाता है और मन ईश्वर या किसी उच्च लक्ष्य की ओर आकर्षित होता है जिससे व्यक्ति भौतिक सुखों से उदासीन हो जाता है। मोह और आसक्ति दुख और कष्ट को जन्म देते हैं। जब कोई व्यक्ति इन दुखों से थक जाता है तो उसे मोह से वैराग्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा मिल सकती है। जैसे यदि किसी मिठाई में जहर मिला हो तो व्यक्ति उसे देखकर भी दूर रहेगा। यह भी एक तरह का वैराग्य है जो भय के कारण उत्पन्न होता किसी घटना के बाद मन में अस्थायी वैराग्य आ सकता है।