करनाल। जिले के 34 राइस मिलों पर पिछले छह सालों से करीब 200 करोड़ रुपये के बकाया सीएमआर की रिकवरी को लेकर हरियाणा सरकार गंभीर हो गई है। चंडीगढ़ में मंगलवार को हुई बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (खाद्य) पीके दास से जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति नियंत्रक को मामले में कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिला प्रशासन ने जिले के सभी तहसीलदारों से जवाब मांगा है कि जब राइस मिलों की प्रापर्टी पहले से अटैच है तो इन पर क्या कार्रवाई हुई है। इनकी नीलामी करके आखिर क्यों सरकारी धन की वसूली नहीं की गई है। 60 करोड़ के सीएमआर बकायेदारी वाले 16 राइस मिल संचालकों को नोटिस जारी किए गए हैं।
2013-14 से 2018-19 तक जिले के 34 राइस मिलों पर करीब 200 करोड रुपये के सरकारी चावल की देनदारी है। ऐसा नहीं है कि विभाग ने इन मिलों पर कार्रवाई नहीं की है। जो भी मिल संचालक सीएमआर नहीं दे सके, उनकी संपत्ति विभाग ने अटैच कर वसूली की कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को प्रस्ताव भेजा है। जिला प्रशासन ने तहसीलदारों को संपत्ति कुर्क कर नीलाम कर धनराशि की रिकवरी के लिए भेज दिया था। लेकिन ये फाइलें अभी भी तहसीलदारों के कार्यालय में धूल फांक रही हैं। राइस मिलर्स भी राजस्व महकमे को अच्छी तरह जानते हैं। इसलिए निश्चिंत होकर फर्मों का नाम बदलकर काम करने लगे। हालांकि अब सरकार व जिला प्रशासन मामले को लेकर गंभीर है। उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने जिलेभर के सभी संबंधित तहसीलदारों से जवाब मांगा है कि बकायेदार राइस मिलों पर बकाया वसूली के लिए अब तक क्या कार्रवाई हुई है। रिपोर्ट आने के बाद ही सही स्थिति का आंकलन हो सकेगा। जिससे अब राजस्व महकमे भी हड़कंप मचा है।
तहसीलदार शीघ्र शुरू करेंगे कार्रवाई
डीएफएससी निशांत राठी ने बताया कि सभी 34 राइस मिलों की संपत्ति तो पहले से ही अटैच कर रखी है। कुर्की व रिकवरी का कार्य तो राजस्व महकमे को करना है। इनमें से करीब एक माह पहले ही 16 राइस मिल संचालकों को नोटिस जारी कर बकाया 60 करोड़ रुपये को जमा कराने को कहा था। लेकिन किसी भी बकायेदार मिलर्स ने न चावल दिया है न उसकी कीमत अदा की है। जिससे उनकी संपत्ति कुर्क करके नीलामी की कार्रवाई तय मानी जा रही है। तहसीलदारों द्वारा यह कार्रवाई शीघ्र शुरू की जाएगी।
सभी मिलों ने ऐसा नहीं किया
सरकार का चावल है, देना तो होगा ही, लेकिन सभी राइस मिलों ने तो ऐसा किया नहीं, चंद मिलों के सामने कुछ ऐसी परिस्थितियां आई थी, जिस कारण वह सीएमआर नहीं लौटा सके। कई मामले ऐसे सामने आए कि मिलर्स सीएमआर देना चाहते हैं लेकिन अधिकारी कोई न कोई बहाना बनाकर चावल लेने से मना कर देते हैं। पंजाब में 125 राइस मिल ऐसे थे, जो सीएमआर नहीं दे सके तो उनसे उस समय धान का मूल्य वापस से लिया लेकिन यहां ऐसा नहीं हो रहा है। हरियाणा सरकार को ऐसी परिस्थितियों वाले राइस मिलों को कुछ सहूलियतें देकर समस्या का समाधान करना चाहिए ताकि मिलर्स का मिल भी चल सके। -हंसराज सिंगला, प्रधान-हरियाणा राज्य राइस मिलर्स एसोसिएशन