माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। बेहतर भविष्य का सपना लेकर विदेश गए बेटे का शव ताबूत में लौटेगा ऐसा परिवार ने कभी नहीं सोचा था। जिले के चौरा गांव निवासी 21 वर्षीय अनुज का पार्थिव शरीर करीब 10 महीने बाद रूस से उसके घर पहुंचा तो गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। नम आंखों के बीच उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
परिजनों के अनुसार, अनुज करीब 10 महीने पहले वर्क वीजा पर रूस गया था। शुरुआती दिनों में उसने एक स्टोर पर काम किया लेकिन इसके बाद हालात अचानक बदल गए। परिवार का आरोप है कि एक एजेंट ने उसे बहला-फुसलाकर जबरन रूसी सेना में भर्ती करवा दिया। इसके बाद से ही उसका जीवन संघर्ष में बदल गया।
छह माह पहले परिवार से टूट गया था संपर्क
करीब छह महीने पहले अनुज से परिवार का संपर्क पूरी तरह टूट गया। बार-बार कोशिशों के बावजूद उससे कोई बात नहीं हो पाई। लंबे इंतजार और अनिश्चितता के बीच परिजनों को बाद में सूचना मिली कि उसकी छाती में गोली लगने से मौत हो गई है। औपचारिकताओं के बाद अनुज का शरीर भारत लाया गया। बुधवार देर रात करीब एक बजे उसका शव दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा जहां से परिजन गांव लेकर आए। जैसे ही ताबूत घर पहुंचा मां और बहनें बार-बार बेहोश हो रही थीं जबकि आसपास मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। गांव में गमगीन माहौल के बीच अनुज का अंतिम संस्कार किया गया।
घर का इकलौता कमाने वाला था
अनुज के दोस्त योगेश कुमार ने बताया कि उसकी आखिरी बार बात अहोई अष्टमी के दिन हुई थी। उस दौरान वह सामान्य था और भविष्य को लेकर आशान्वित नजर आ रहा था। इसके बाद उससे संपर्क पूरी तरह टूट गया। परिवार ने बताया कि अनुज ही घर का इकलौता कमाने वाला था। उसके कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। उसकी कमाई से ही घर का खर्च चलता था और छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई हो रही थी।
कर्ज में डूबा परिवार
शव को भारत लाने की प्रक्रिया में भी परिवार को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ा जिससे वे कर्ज में डूब गए हैं। अब परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। परिजनों ने शव को भारत लाने में कई लोगों से कर्ज लिया तब जाकर 6 माह बाद शव वापस आया है।