करनाल। रोहतक के लाहली में आयोजित रणजी ट्रॉफी में केरल के खिलाफ खेले गए मैच की एक पारी में 10 विकेट लेकर ऑलराउंडर अंशुल कांबोज सुर्खियों में रहे। मंगलवार को करनाल पहुंचने पर अंशुल ने बताया कि वह ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज मैकग्राथ को आदर्श मानते हैं। उन्होंने ग्लेन मैकग्राथ की तकनीक से बहुत कुछ सीखा। उसकी बदौलत वह हर ट्रॉफी में नए-नए कीर्तिमान रच रहे हैं।
अंशुल ने बताया कि किसी भी प्रतियोगिता का परिणाम उनके लिए इतने मायने नहीं रखता, जितना कि मैच के दौरान अपना 100 प्रतिशत देने का मेरा प्रयास रहता है। मेरा आत्मविश्वास ही मेरी सफलता का राज है। गेंदबाजी करते समय कोशिश रहती है कि ग्लेन मैकग्राथ की तरह एक ही क्षेत्र पर पूरा फोकस रहे। क्रिकेट में हर दिन नया होता है, मेरा प्रयास रहता है कि हर मैच में मेरा प्रदर्शन अव्वल रहे। आईपीएल में भी प्रयास रहेगा कि मैं अपनी टीम के लिए ज्यादा से विकेट ले सकूं और जीत दिलवाऊं। मेरी कामयाबी में सबसे अहम रोल मेरे पिता और कोच का रहा है जिन्होंने मुझे हर प्रतियोगिता के लिए तैयार किया और हर जरूरतों को पूरा भी कर रहे हैं।
कर्ण नगरी के फाजिलपुर गांव के अंशुल कांबोज ने रणजी ट्रॉफी के पांचवें राउंड में केरल के खिलाफ पहली पारी में 10 विकेट लिए। लाहली में केरल के खिलाफ खेले गए रणजी मैच की पहली पारी में 49 रन देकर सभी खिलाड़ियों को पवेलियन भेजा। यह कीर्तिमान रच कर वह किसी टूर्नामेंट के इतिहास में एक पारी में 10 विकेट लेने वाले तीसरे गेंदबाज बने। पिछले माह हुए इमर्जिंग एशिया कप में अंशुल ने तीन मैचों में 10 की इकोनॉमी रेट से गेंदबाजी की और चार विकेट भी लिए। अंशुल कांबोज पिछले घरेलू सत्र के दौरान सुर्खियों में आए।
उन्हें आईपीएल 2024 सत्र के लिए मुंबई इंडियंस की ओर से चुना गया। वहीं पिछले साल हरियाणा को पहली बार विजय हजारे ट्रॉफी जीतने में भी अंशुल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने 10 मैचों में सबसे ज्यादा 17 विकेट लेकर अपनी टीम को जीत दिलवाई। इस बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत वह टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों में शामिल हुए। करनाल के ओपीएस विद्या मंदिर स्कूल की राणा ब्रदर्स अकादमी की ओर से उनका भव्य स्वागत किया गया। इस मौके पर उनके मुख्य कोच सतीश राणा व अकादमी के खिलाड़ी मौजूद रहे।
तेज गेंदबाजों का फिट रहना जरूरी
तेज गेंदबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने आप को फिट करने की रहती है। गेंदबाज को अपनी डाइट के साथ-साथ अपनी सेहत का भी पूरा ध्यान रखना पड़ता है। उनका आत्मविश्वास ही उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। उनके फूफा ने बताया कि अंशुल ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए काफी मेहनत की है। पिछले तीन साल से अंशुल क्रिकेट में अच्छे परिणाम दे रहा है। इसी परिणाम की बदौलत अंशुल महज 23 साल की उम्र में क्रिकेट के चमकते सितारे बनकर उभरे हैं। संवाद
शुरुआत से समय के पाबंद
कोच सतीश ने बताया कि अंशुल शुरुआत से ही समय का पाबंद है। क्रिकेट के प्रति उसका जुनून बचपन से है। किसी भी टूर्नामेंट से पहले अंशुल अभ्यास के दौरान भी खूब पसीना बहाता है। अकादमी के खिलाड़ियों का कहना है कि अंशुल जब भी आते हैं उन्हें गेंदबाजी की बारीकियां जरूरी सिखाकर जाते हैं। उन्हें विश्वास है कि बहुत जल्द अंशुल भारतीय टीम में अपनी गेंदबाजी का जलवा दिखाएगा।