चकबंदी में गड़बड़ी के मामले में पांच गांवों लालूपुरा, भरतपुर, अराईपुरा, कालरम और अमृतपुर के किसानों ने अब गांव खाली करने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता तब तक वे गांव नहीं लौटेंगे।
11 फरवरी को परिवार सहित इन पांचों गांव के किसान दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरना शुरू कर देंगे।
पांचों गांवो की संघर्ष समिति के प्रधान प्रदीप कालरम ने बताया कि उन्होंने प्रशासन को लगभग एक महीने पहले ज्ञापन के माध्यम से अवगत करायंा था कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा और चकबंदी अधिकारी दलबीर सिंह का तबादला नहीं होगा तो पीड़ित किसान 11 फरवरी को पांचों गांवों को खाली करने का ऐलान करेंगे और दिल्ली के लिए अपने परिवार व पशुओं के साथ दिल्ली धरना प्रदर्शन के लिए रवाना हो जाएंगे।
वे तब तक वापस नहीं आएंगे जब तक अधिकारी दलबीर सिंह का तबादला नहीं हो जाता।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस अधिकारी ने अपने चार पटवारियों सहित पूरे पांच गांव को उजाड़कर नाजायज तरीके से चकबंदी की।
एबीसी की कैटेगरी में भूमाफियाओं को जायदाद सौंपी और हकदार पीड़ित किसानों को किसानों से मजदूर बनाने पर मजबूर किया और दर-ब-दर कि ठोकरें खाने को भी मजबूर किया।
पांचों गांवों के हजारों किसान यह बार-बार प्रशासन से मांग कर चुके हैं कि जब तक यह अधिकारी यहां पर रहेगा तब तक हमें न्याय नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा कि यह अधिकारी लगभग दस साल से करनाल में कार्यरत हैं, जो कि अपने ऊपर रसूखदारों लोेगों के सहयोग की वजह से 10 साल से अपनी मनमर्जी करता आ रहा है। एसीओ अपने आप को प्रदेश के एक बड़े मंत्री का भांजा बताते हैं। यहां तक कि जिले के अधिकारियों ने भी उनका और चार पटवारियों का तबादला कराने का प्रयास किया, लेकिन नहीं करा सके।
लालूपुरा, भरतपुर, अराईपुरा, कालरम, अमृतपुर के किसानों का कहना है कि 9 महीने से लगातार चला आ रहा शांतिप्रिय आंदोलन तब तक चलता रहेगा जब तक उनको न्याय नहीं मिलेगा और उनके पूर्वजों द्वारा खरीदी हुई जमीन उन्हें वापस नहीं मिलती।
उन्हाेंने कहा कि वे प्रशासन से जवाब चाहते हैं कि या तो हमारे कागजातों को गलत साबित करें, अगर वह सही हैं तो हमारा हक हमें वापस दिया जाए।
पीड़ित किसानों का कहना है कि जब तक एसीओ का तबादला यहां से कहीं ओर नहीं हो जाता तब तक वो दिल्ली से वापस नहीं आएंगे और आंदोलन को लगातार जारी रखेंगे। इस अवसर पर पांचों गांवों के चयनित दस कमेटी मेंबर और काफी संख्या में किसान मौजूद थे।