इस्माईलाबाद। 15 साल पहले मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा किए जाने व इस्माईलाबाद ग्राम पंचायत से नगर पालिका बन जाने के बावजूद आज तक खेल स्टेडियम नहीं मिल पाया है। ऐसे में क्षेत्र में खिलाड़ी तैयार नहीं हो पा रहे हैं। युवाओं का खेलों के प्रति उत्साह घट रहा है। जो उत्साहित है उन्हें भी स्टेडियम के अभाव में कभी अनाजमंडी के पक्के फड़ों पर तो कभी किसी राइस मिल परिसर में ही अपना शौक पूरा करना पड़ रहा है। प्रदेश को खेलों को हब होने के दावों के बावजूद स्टेडियम की कमी से युवाओं में निराशा बढ़ रही है।
2010 में कांग्रेस की शाहाबाद रैली के दौरान तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस्माईलाबाद में खेल स्टेडियम बनाने की घोषणा की थी, जिसके लिए गांव चम्मू कलां की मौजूदा ग्राम पंचायत ने करीब छह एकड़ जमीन स्टेडियम के लिए दी थी। स्टेडियम निर्माण के लिए 14 लाख रुपये की ग्रांट भी आई, जिससे चहारदीवारी व शौचालय आदि बनाए गए। इससे लोगों को आस जगी थी जल्द ही स्टेडियम की सौगात मिलेगी और नए खिलाड़ी तैयार होंगे लेकिन स्टेडियम निर्माण कार्य ठंडे बस्ते में चला गया, जो आज तक बाहर नहीं निकल पाया। 14 लाख खर्च कर बनाए शौचालय व कमरा भी खंडहर हो गया।
वर्ष 2018-19 में इस्माईलाबाद ग्राम पंचायत से नगरपालिका बना तो फिर स्टेडियम की उम्मीद जगी तो लोगों ने मांग पत्र भी अनेक बार दिए। मांग को देखते हुए 2020 में एक कमेटी का गठन किया गया, जिसकी अध्यक्षता उस समय पिहोवा के एसडीएम ने की तथा टीम ने मौके का दौरा कर स्टेडियम के लिए दिए गए क्षेत्र को फल्ड एरिया तथा हाईवे से लो लैंड बताया। टीम का मानना था कि इस जमीन पर स्टेडियम बनाने के लिए लेवल हाईवे व शहर की जमीन से अधिक करना होगा, जिससे इस पर खर्च अधिक होगा। टीम ने नगरपालिका से अन्य जगह जमीन देने की बात कही। इसके बाद से यह मामला इसी तरह फाइलों में ही आज तक अटका हुआ है तो क्षेत्र की वर्षों से मांग भी लंबित है।
पंचायत विभाग के जेई अनिरुद्ध का कहना है कि 2020 में स्टेडियम को बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। मौजूदा एसडीएम की अध्यक्षता में टीम ने चम्मू कलां गांव के उक्त जमीन का मूल्यांकन में पाया कि यह जमीन दोनों तरफ लगने वाले हाईवे से काफी गहराई में है। यहां स्टेडियम बनाएं तो खर्च अधिक होगा और ऐसे में इस जगह को खारिज कर दिया गया तो नगरपालिका को अन्य स्थान पर जगह देने को कहा गया था।
प्रतिभा निखारने के लिए स्टेडियम जरूरी
समाजसेवी बलदेव शर्मा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों में काफी प्रतिभा है। उन्हें केवल सही मार्गदर्शन की जरूरत है और उन्हें सही मार्गदर्शन स्टेडियम में कोच से ही मिल सकता है। सही मार्गदर्शन न मिलने से प्रतिभाशाली युवा भी अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं और उनकी प्रतिभा पूरी तरह से निखर ही नहीं पाती। शहर व क्षेत्र में खेल स्टेडियम तो होना ही चाहिए।
दूर दराज के स्टेडियम में जाने को मजबूर खिलाड़ी
शहरवासी मयंक बताते हैं कि शहर में खेल स्टेडियम न होने से खिलाड़ियों को अभ्यास करने के लिए अंबाला 40 किलोमीटर, कुरुक्षेत्र 30 तथा शाहाबाद 35 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। शहर के आसपास के गांवों के बच्चों को तो और भी अधिक परेशानी उठानी पड़ती है।
मुद्दा उछलता रहा पर स्टेडियम नहीं बन पाया
शहरवासी पंकज का कहना है कि स्टेडियम बनाए जाने का मुद्दा तो हर चुनाव व उसके बाद भी उछलता रहा पर आज तक बन नहीं पाया। स्टेडियम न होने से क्षेत्र के युवाओं का खेलों के प्रति उत्साह कम होता जा रहा है। यह मांग शहरवासी लंबे समय से मांग कर रहे हैं। इस्माईलाबाद बड़े शहरों के बीच का ऐसा सेंटर है जहां पर स्टेडियम बनने से आसपास के 20 से ज्यादा गांवों के खिलाड़ियों को लाभ मिलेगा।
इस्माईलाबाद। स्टेडियम की टूटी हुई चार दिवारी व उगी जंगली घास। संवाद
इस्माईलाबाद। स्टेडियम की टूटी हुई चार दिवारी व उगी जंगली घास। संवाद
इस्माईलाबाद। स्टेडियम की टूटी हुई चार दिवारी व उगी जंगली घास। संवाद
इस्माईलाबाद। स्टेडियम की टूटी हुई चार दिवारी व उगी जंगली घास। संवाद
इस्माईलाबाद। स्टेडियम की टूटी हुई चार दिवारी व उगी जंगली घास। संवाद
इस्माईलाबाद। स्टेडियम की टूटी हुई चार दिवारी व उगी जंगली घास। संवाद