करनाल के तरावड़ी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन शुक्रवार को एक श्रद्धालु ने अनिरुद्धाचार्य महाराज से सवाल किया कि संत राम पाल के सेवादार सनातन धर्म और देवी देवताओं का अपमान करते हैं। इसके जवाब में अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि इन लोगों को विदेश फंडिंग मिल जाती है। इसीलिए ये सनातन धर्म का विरोध करते हैं। ये सनातन के शत्रु है, हमें इनके एजेंडे से बचना चाहिए।
कथा के दौरान सवाल करते हुए युवक ने कहा कि सनातन धर्म सबसे श्रेष्ठ धर्म है। आजकल एक आठवां अजूबा धरती पर है, जिनका नाम संत रामपाल है। उनके सेवादार भागवान शिव और कृष्ण भगवान के बारे में गलत बोलते हैं। संविधान या कानून में कहा लिखा है कि भगवानों को गालियां दी जाए।
इस पर अनिरुद्धाचार्य ने कहा, वे सनातन के दुश्मन हैं। क्रिश्चियन लोग सीधे तो विरोध कर नहीं सकते, मगर ऐसे लोगों को अपने साथ रखकर उन्हें सनातन के खिलाफ करना चाहते हैं।
संत के वेश में कोई गलत काम करे तो सजा जरूर मिलनी चाहिए
पत्रकारों से बातचीत में सवाल के जवाब में अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि भगवा पहनकर जो गलत करते हैं, उन्हें सजा मिलनी ही चाहिए। राम ने रावण को इसलिए मारा था क्योंकि उसने संत के वेश में बुरा कर्म किया था, इससे संत समाज बदनाम हुआ था। इसलिए अब गलत करे उसे दंड मिलना ही चाहिए।
माता-पिता का सहारा बनें, अश्लीलता से बचें युवा
युवाओं को संदेश देते हुए अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि सभी अपने माता-पिता की सेवा करे, उन्हें घर से न निकालें। अश्लीलता पर कहा कि ऐसा व्यवहार गलत है, जमाना बदला है पर संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए। ऐसे आचरण से युवा बचें। पराई स्त्री और पुरुष का संग गलत है। धर्म से ही चलना चाहिए। सभी को अपने लिए समय जरूर निकालना चाहिए।