संवाद न्यूज एजेंसी।
करनाल। ऑल हरियाणा गवर्नमेंट पीडब्ल्यूडी मैकेनिकल वर्कर्स यूनियन ने शुक्रवार को जलघर इंद्री पर धरना दिया। धरने का मुख्य उद्देश्य सरकार की कर्मचारी विरोधी नितियों और वादाखिलाफी का विरोध करना रहा।
यूनियन के जिला प्रधान रजिस्टर राणा ने कहा कि हरियाणा सरकार ने चुनाव के दौरान घोषणा की थी कि सरकार बनने के बाद हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से विभागों में कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा अधिनियम बनाकर सभी कर्मचारियों को 58 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा प्रदान की जाएगी। सरकार ने वादाखिलाफी करते हुए सेवा सुरक्षा प्रदान करने के बजाय कर्मचारियों को सेवामुक्त करना शुरु कर दिया है।
कुछ दिनों के दौरान सरकार की ओर से सिंचाई विभाग से हजारों कर्मचारियों को सेवामुक्त कर दिया गया है। इस कारण ये सभी कर्मचारी अपने परिवार के साथ सड़कों पर आ गए हैं। इन कर्मचारियों के लिए अपने परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो गया है। इन सब के बावजूद सरकार एक और कर्मचारी विरोधी नीति लेकर आई है।
इस नीति में एक अप्रैल से जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अंतर्गत चलने वाली गांव की जल आपूर्ति ग्राम पंचायत को और शहर की जल आपूर्ति नगर पालिका को सौंप दी जाएगी। इससे विभाग का अस्तित्व खत्म हो जाएगा और विभाग में कार्यरत कर्मचारी बेरोजगार होकर परिवार सहित सड़कों पर आ जाएंगे। संगठन सरकार की इस नीति का पुरजोर विरोध करता है।
विकास ने आरोप लगाया कि पंचायत की ओर से कर्मचारियों से नालियां सफाई करवाने का, कुड़ा-कचरा इकट्ठा करने और पंचायत का हर कार्य पंप चालकों से करवाया जा रहा है। पंचायत में सरपंच अपनी मर्जी से पानी की सप्लाई करवाता है इससे पानी व्यर्थ बहता है और नहीं चलाने पर सरपंच पंप चालकों के साथ गाली-गलौच करते हैं।