मनीषा के लिए मांगा इंसाफ, एफआरएस को वापस लिए जाने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन ने वीरवार को मनीषा हत्याकांड और चेहरे की पहचान की पद्धति (एफआरएस) के विरोध में काला दिवस मनाया। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं ने फव्वारा पार्क में बैठक करके वहां से लघु सचिवालय तक जुलूस निकाला। यहां धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री के नाम मांगों से संबंधित एक ज्ञापन तहसीलदार को साैंपा।
इस मौके पर यूनियन के जिला प्रधान बिजनेश राणा और रूपा राणा ने कहा कि मनीषा को इंसाफ मिलना चाहिए। जिसकी हत्या से देशभर की महिलाओं में गुस्सा हैं। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं के लिए अनिवार्य किए गए फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) को वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के आदेशानुसार गर्भवती महिलाओं और छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों को दिए जाने वाले राशन के लिए पोषण ट्रैकर एप में एफआरएस के माध्यम से कार्यकर्ताओं के मोबाइल फोन से अपडेट करने के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। इसलिए मांग रखी गई कि टीएचआर व अन्य लाभों के लिए एफआरएस प्रमाणीकरण की अनिवार्यता वापस ली जाए।
वहीं आंगनबाड़ी रिपोर्टिंग प्रणाली के डिजिटलीकरण से पहले सभी केंद्रों में कंप्यूटर और लैपटाॅप उपलब्ध करवाएं जाए, अच्छी गुणवत्ता के मोबाइल फोन दिए जाएं और पर्याप्त मुफ्त वाई-फाई कनेक्शन दिया जाए। सहायक वर्कर से लेकर सुपरवाइजर की प्रमोशन की जाए, 25 प्रतिशत कोटे को बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाए और न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये दिया जाए। इन सभी मांगों के लिए विरोध प्रदर्शन किया गया जिनमें ओपी माटा, सतपाल सैनी और जगपाल राणा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।