शहर की कर्ण पार्क में प्रदेशभर से सैकड़ों की संख्या में आंगनबाड़ी वर्करों और हेल्परों ने अपनी मांगों के समर्थन में धरना देकर सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया। धरने के दौरान महिलाओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदेश भर की आंगनबाड़ी वर्कर ने यूनियन के बैनर तले कर्ण पार्क में इकट्ठे होकर शहर में प्रदर्शन करते हुए सभी आंगनबाड़ी वर्कर जिला सचिवालय पहुंची और अपनी मांगों का पत्र डीआरओ राजबीर धीमान को सौंपा। आंगनबाड़ी वर्करों के धरने की अध्यक्षता राज्य प्रधान छोटा गहलावत द्वारा की गई। स्टेज का संचालन राज्य महासचिव जगमती मलिक ने किया गया।
प्रदेशभर से आई कार्यकर्ताओं ने सरकार की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने 7वें वेतन को लागू करते हुए कर्मचारियों, विधायकों और सांसदों का ध्यान रखा, लेकिन लंबे समय से अपने हकों की लड़ाई लड़ रही आंगनबाड़ी वर्करों और हेल्परों की अनदेखी की गई। महासचिव जगमती मलिक ने कहा कि सरकार आंगनबाड़ी वर्कर को 3000 और हेल्पर को 1500 रुपये प्रतिमाह वेतन का भुगतान कर रही है। विरोध जताते हुए आंगनबाड़ी वर्करों ने कहा कि उन्हें यह वेतन भी कई-कई माह में दिया जाता है। वर्करों ने रोष जताते हुए कहा कि उन्हें 6 घंटे की ड्यूटी के बाद उन्हें बीएलओ, जनगणना, स्वच्छता अभियान, बेटी बचाओ आदि के अन्य काम करते हुए भी बेघर रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी के रिकार्ड के लिए रजिस्टर, आंगनबाड़ी भवन का किराया, फोटो भेजने सहित अन्य खर्च उन्हें अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है।
इसके अलावा उन्हें किसी भी तरह का कोई भी चिकित्सा भत्ता नहीं दिया जाता। इस मौके पर राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष कुंज, कोषाध्यक्ष संतरो, राजबाला शर्मा, मूर्ति देवी, रामरती, अनुपमा सैनी, नीलम रानी, उर्मिला शर्मा, सुनीता, सरोज दहिया, बिमला राठी, कमलेश, सरोज चहल कमला दलाल सहित सैकड़ों महिलाएं मौजूद रही।
ये हैं मांगें
कुशल श्रमिक के लिए निर्धारित न्यूनतम वेतन 18000 रुपये वर्कर और 15000 रुपये हेल्पर दिया जाए। भारत सरकार के कर्मचारियों के बराबर सामाजिक सुरक्षा और अन्य सुविधाएं वर्करों और हेल्परों को दी जाएं। आंगनबाड़ी भवनों का किराया शहर में 6000 और ग्रामीण में 3000 रुपये दिया जाए। अतिरिक्त हेल्परों का प्रावधान करना चाहिए, ताकि एक हेल्पर के छुट्टी पर जाने पर आंगनबाड़ी का कार्य प्रभावित न हो। हेल्पर से वर्कर पदोन्नत करने का कार्य अनुभव 10 वर्ष की बजाए तीन वर्ष किया जाए। आंगनबाड़ी लाभार्थियों को दिए जाने वाले आहार में पोषाहार की मात्रा और गुणवत्ता बढ़ाई जाए। खाना बनाने के लिए सरकार खुद सिलेंडर की सप्लाई करें, क्योंकि 30 पैसे प्रति लाभार्थी के अनुसार मिलने वाले पैसे से सिलेंडर नही भर सकता। सुपरवाइजरों के सभी पद वर्करों की प्रमोशन से भरे जाएं।