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Karnal News: बीमारी छिपाने का आरोप साबित नहीं हुआ, दावे के भुगतान का आदेश

Thu, 19 Mar 2026 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा क्लेम खारिज करने के मामले में बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी को कड़ी फटकार लगाई है। कंपनी ने बीमारी छिपाने की बात कहकर सेक्टर-6 निवासी उपभोक्ता विकास सैनी की बीमारी का क्लेम खारिज करते हुए पाॅलिसी रद्द कर दी थी। आयोग ने कंपनी की दलीलों को मनमाना और अनुचित बताते हुए पीड़ित उपभोक्ता को 98,661 रुपये का मेडिकल क्लेम नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश दिया है।
मानसिक उत्पीड़न और कानूनी कार्रवाई पर आए खर्च के ताैर 31 हजार रुपये मुआवजा देना होगा। वहीं कंपनी को उपभोक्ता की रद्द की गई पाॅलिसी को दोबारा से चालू करना होगा।
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सेक्टर-6 निवासी विकास सैनी ने बजाज आलियांज से पांच लाख रुपये की हेल्थ इंश्योरेंस पाॅलिसी ली थी। मई, 2022 में सिरदर्द की शिकायत के बाद उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें एक्रोमेगाली-पिट्यूटरी मैक्रोडेनोमा (मस्तिष्क की ग्रंथि में ट्यूमर) का पता चला। विकास के इलाज पर 98,661 रुपये खर्च हुए। उन्होंने बीमा कंपनी के पास क्लेम के लिए आवेदन किया। कंपनी ने यह कहकर कि उन्हें 15 साल से सिरदर्द और जबड़े की समस्या थी, जिसे उन्होंने पॉलिसी लेते समय छिपाया था, क्लेम को खारिज कर दिया।
बीमा कंपनी ने आयोग के समक्ष अपनी जांच रिपोर्ट के आधार पर इसे पहले से मौजूद बीमारी करार दिया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि कंपनी की ओर से पेश की गई जांच रिपोर्ट महज एक फोटोकॉपी थी, जिस पर न तो किसी जांचकर्ता के हस्ताक्षर थे और न ही कोई मुहर थी। आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह, सदस्य नीरू अग्रवाल और सर्वजीत काैर ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी यह साबित करने में पूरी तरह विफल रही कि शिकायतकर्ता को पॉलिसी लेने से पहले इस बीमारी की जानकारी थी। कंपनी ने किसी भी डॉक्टर का हलफनामा या ठोस मेडिकल रिकॉर्ड पेश नहीं किया, जो इस दावे की पुष्टि कर सके। आयोग ने कहा कि जांच रिपोर्ट की कानूनी तौर पर कोई वैल्यू नहीं है, क्योंकि इसे प्रमाणित नहीं किया गया।
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पॉलिसी को पुन: बहाल करे कंपनी
आयोग ने टिप्पणी की कि आजकल बीमा कंपनियां पॉलिसी बेचते समय बड़े-बड़े वादे करती हैं, लेकिन क्लेम के समय बहानेबाजी करती हैं। अदालत ने बजाज आलियांज को आदेश दिया कि वह विकास सैनी को इलाज की पूरी राशि यानी 98,661 रुपये नाै प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से दे। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना के लिए 20 हजार और मुकदमेबाजी पर आए खर्च के ताैर पर 11 हजार रुपये का मुआवजा उपभोक्ता को दे। आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिए कि वह उपभोक्ता की रद्द की गई पॉलिसी को पुनः बहाल करे।
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