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Karnal News: नाबालिग और युवाओं में बढ़ी शराब, तंबाकू की लत

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राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस
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- छह माह में ओपीडी में पहुंचे 4700 केस, इनमें तंबाकू के दो हजार तो शराब के 1400 लोग शामिल

संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले में स्मैक से ज्यादा शराब व तंबाकू का नशा बढ़ता जा रहा है। जिसकी चपेट में तेजी नाबालिग व युवा आ रहे हैं। जिले में आंकड़ों की बात करें तो छह माह में नागरिक अस्पताल की मनोरोग ओपीडी में नशे से संबंधित 4700 केस पहुंचे।
जिला नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मनन गुप्ता ने बताया कि तंबाकू व शराब को गेटवे ड्रग्स कहा जाता है क्योंकि यह नशे का पहला चरण और नशे की दुनिया में रखा जाने वाला पहला कदम है। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह बड़ी आसानी से दुकानों पर उपलब्ध हो जाता है। छह माह में उनकी ओपीडी में 4700 केस पहुंचे थे। इनमें सबसे अधिक तंबाकू के दो हजार केस, शराब के 1400 केस और स्मैक के 1300 केस सामने आए हैं। जिन्हें दवाओं व काउंसलिंग के माध्यम से छुड़वाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आजकल युवाओं के बाद नाबालिग बच्चों में नशा बढ़ रहा है। स्कूली स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती हैं। इसी दौरान वे बच्चों की काउंसलिंग भी करती हैं। इनमें से अधिकतर स्कूलों में नशा करने वाले नाबालिग मिल रहे हैं। जिनकी काउंसलिंग करवाई जा रही है।
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नशा करने के कई कारण
मनोरोग समाज कल्याण अधिकारी विकास ने बताया कि सह कर्मियों के दबाव (पीर प्रेशर) के अलावा युवाओं में नशे की आदत के कई कारण हो सकते हैं। इनमें आनुवांशिक प्रवृति, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, पारिवारिक वातावरण, शिक्षा की कमी, सामाजिक-आर्थिक कारण, दुखद घटनाएं व बचपन के दुखद अनुभव शामिल हो सकते हैं। पीर प्रेशर केवल एक पहलू होता है। वहीं, युवाओं को नशीले पदार्थों का उपयोग करने की ओर बढ़ने के लिए प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं जैसे कि डिप्रेशन, चिंता के कारण युवा नशीली दवाओं का उपयोग करने की ओर बढ़ सकते हैं। वहीं, जागरूकता की कमी से भी बच्चे व युवा नशा करने लग जाते हैं।
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