तरावड़ी। स्थानीय अनाज मंडी के आढ़तियों की सरकार की ओर खड़ी लाखों रुपये की गेहूं के सीजन की आढ़त अभी तक नहीं मिली। खाद्य-आपूर्ति विभाग व हैफेड एजेंसी की ओर मंडी के आढ़तियों के करीब 35 लाख रुपये बकाया हैं। आढ़तियों का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
आढ़तियों का कहना है कि सरकार की तरफ से गेहूं एवं धान की खरीद पर 2.50 प्रतिशत कमीशन (आढ़त) देने का प्रावधान है। सरकार या कोई प्राइवेट एजेंसी मंडी से धान व गेहूं की खरीद करती है तो उसे आढ़ती को यह कमीशन देना पड़ता है। इस बार सरकार ने अपनी एजेंसियों के माध्यम से मंडी से जो गेहूं की खरीद की थी उस पर आढ़तियों को 46 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से कमीशन दी गई। जबकि आढ़तियों की कमीशन 49.37 रुपये प्रति क्विंटल बनती है। आरोप लगाया कि सरकार की ओर से 3.37 रुपये कम दिए गए।
तरावड़ी अनाज मंडी के आढ़ती राजेश कुमार ने कहा कि सरकार की ओर से गेहूं के सीजन में पहले कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था। सरकार की तरफ से बनाए गए ई खरीद पोर्टल पर आढ़ती जो अपना आई व जे फार्म बनाते हैं उसमे भी कमीशन 49.37 रुपये ही अपलोड है। उन्होंने अपने जमा खर्च भी उसी हिसाब से किए लेकिन जब कमीशन आढ़तियों के खाते में आई तो वे हैरान रह गए। यह कमीशन 46 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से आई। उन्होंने बताया कि उच्च अधिकारियों से इस बाबत बात की थी लेकिन सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
भारतीय खाद्य निगम की ओर से गेहूं खरीद का कार्य राज्य एजेंसियों के मार्फत किया जाता है। निगम ने ही 46 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से कमीशन दी है। आढ़ती स्वयं का ठगा सा महसूस कर रहे हैं। तरावडी मंडी में इस वर्ष करीब 10.25 लाख क्विंटल गेहूं की खरीद राज्य एजेंसियों के माध्यम से हुई। कम कमीशन आने से इस मंडी के आढ़तियों को करीब 35 लाख का नुकसान हुआ है। उनकी सरकार से अपील है कि उनकी शेष कमीशन शीघ्र जारी की जाए।
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वर्जन नहीं
सरी ओर इस संबंध में जिला खाद्य-आपूर्ति अधिकारी निशांत राठी से बात करनी चाही लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।