स्वचालित प्रणाली से बंद और शुरू होंगे नलकूप, खराबी आने पर संबंधित अधिकारी को पहुंचेगी तत्काल सूचना
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। शहर में लागू की जा रही स्काडा परियोजना का कार्य आगामी दो माह में पूर्ण होगी। साढ़े 38 करोड़ की इस परियोजना का 75 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है। इस परियोजना के पूरे होने से शहर की पेयजल व्यवस्था बेहतर हो सकेगी। पेयजलापूर्ति के लिए शहरभर में लगाए गए नलकूप, बूस्टर स्टेशन व ओवर हेड रिजरवायर स्वत: संचालित प्रणाली (ऑटोमेटिक सिस्टम) से शुरू और बंद किए जा सकेंगे। साथ ही इनमें खराबी आने की सूचना भी संबंधित अधिकारी कर्मचारी तक तत्काल ही पहुंच सकेगी, जिससे उसका निस्तारण भी समय से किया जा सकेगा।
निगमायुक्त डॉ.वैशाली शर्मा ने बताया कि स्काडा परियोजना के अंतर्गत नलकूप, बूस्टर स्टेशन तथा ओवरहैड टैंक पर विभिन्न प्रकार के उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं। अब तक 135 नलकूपों, मॉडल टाउन स्थित बूस्टर स्टेशन तथा राम नगर, पुरानी अनाज मंडी व जुंडला गेट स्थित ओवरहेड टैंक पर स्काडा के तहत लगाए जाने वाले सभी प्रकार के उपकरण स्थापित किए जा चुके हैं। कर्ण स्टेडियम परिसर स्थित ओवरहेड टैंक पर भी करीब सभी उपकरण लग चुके हैं। 122 नलकूप, एक बूस्टर स्टेशन तथा दो ओवरहैड टैंक को आईसीसीसी. से जोड़ दिया गया है।
इस कार्य में सॉफ्ट स्टार्टर, फ्लोमीटर, प्रेशर ट्रांसमीटर, पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए एनालाईज़र, प्रोग्राम लॉजिकल कंट्रोल (पीएलसी.) यूनिट यानी प्रोग्राम तार्किक नियंत्रण इकाई व स्लूज वाल लगाए जा चुके हैं। इसके साथ-साथ जीपीआरएस. मोडम, जंक्शन बॉक्स, लेवल ट्रांसमीटर, सीसीटीवी. तथा नेटवर्किंग इत्यादि कार्य किए जा रहे हैं।
निगमायुक्त ने बताया कि पेयजल आपूर्ति के नेटवर्क के तहत शहर में अलग-अलग स्थलों पर 182 नलकूप, 3 बूस्टर स्टेशन तथा 4 ओवरहेड टैंक लगे हैं। योकोगावा इंडिया लिमिटेड एजेंसी इन सभी पर स्काडा के उपकरण स्थापित करने का काम कर रही है। इसके साथ-साथ इनके कनेक्शन भी किए जा रहे हैं। स्काडा परियोजना को एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी.) से जोड़ा जा रहा है, जहां से रियल टाइम डाटा एकत्र होगा। उपकरणों की निगरानी और उन पर नियंत्रण होगा। कार्य पूरा होने के बाद पांच वर्ष तक एजेंसी ही सभी उपकरणों का संचालन एवं रख-रखाव करेगी।
इस सुविधा से शहर में क्षेत्र अनुसार पानी की पर्याप्त उपलब्धता के साथ-साथ पाइप लाइनों की लीकेज और उसका समाधान सुनिश्चित होगा। नलकूप ऑटोमेटिक सिस्टम से ऑन-ऑफ होंगे। पेयजल में क्लोरीन की संतुलित मात्रा मौजूद रहेगी, जिससे इसकी शुद्धता बनी रहेगी। स्काडा एप्लीकेशन के जरिए पूरे सिस्टम पर ऑनलाइन नियंत्रण रहेगा।
क्या है स्काडा
- स्काडा (पर्यवेक्षी नियंत्रण और डाटा अधिग्रहण) सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर, दोनों तत्वों की एक केंद्रीयकृत प्रणाली है, जो पूरे क्षेत्र की निगरानी और नियंत्रण करती है। पर्यवेक्षी प्रणाली प्रक्रिया से डाटा एकत्र होता है और कमांड नियंत्रण को भेजा जाता है। यह डाटा, सिस्टम से जुड़े सेंसर, नेटवर्क और उपकरणों से प्राप्त होता है। सेंसर, गति, प्रवाह ओर दबाव जैसे मापदंडों को मापते हैं।