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Karnal News: साइबर ठगी के बाद अपनों के तानों का हो रहे शिकार

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गगन तलवार
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करनाल। साइबर ठगी के बाद लोग अपनों के तानों का शिकार हो रहे हैं। आर्थिक नुकसान झेलने के बाद ऐसे लोग पुलिस को शिकायत देने के बाद नाम भी गोपनीय रखने की अपील करते हैं। वहीं नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ के पास भी पहुंच रहे हैं। इनमें हाई प्रोफाइल वाले लोग ज्यादा हैं।

साइबर थाना के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर दूसरे दिन एक व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार हो रहा है। 2025 में अब तक 138 केस दर्ज हुए हैं। इसके अलावा ऐसे भी कई मामले हैं, जो अभी तक पुलिस तक नहीं पहुंचे। साइबर अपराधियों के निशाने पर ज्यादा पढ़े लिखे बेरोजगार और ऑनलाइन सक्रिय रहने वाले ज्यादा लोग हैं। अब तक हुई वारदात में वैज्ञानिक, शिक्षक, वकील, इंजीनियर, डॉक्टर, पूर्व सैनिक और कंप्यूटर व आईटी एक्सपर्ट साइबर अपराधियों का शिकार बने हैं। युवाओं के अलावा बुजुर्गों को भी वे मोहरा बनाते हैं।
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केस-1

क्रेडिट कार्ड के चक्कर में पूर्व सैनिक ने गंवाए 3.55 लाख

बसंत विहार निवासी एक पूर्व सैनिक ने बताया कि उन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा का एक्स सर्विसमैन का क्रेडिट कार्ड के लिए ऑनलाइन फार्म भरा था। अगले दिन उनके पास एक नंबर से कॉल आया और उनसे क्रेडिट कार्ड के लिए जानकारी मांगी। आरोपी ने उनके मोबाइल की स्क्रीन शेयर कराते हुए क्रेडिट कार्ड संबंधित अन्य जानकारी ली। दावा किया कि बिना ऑफलाइन दस्तावेज दिए छह घंटे में कार्ड बन जाएगा। इसके बाद शाम तक उनके बैंक खाते से 3.55 लाख रुपये कट गए।



केस-2

आईटी कंपनी के कर्मचारी को ऋण का आवेदन पड़ा महंगा

आईटी कंपनी में टेक्नीशियन की नौकरी करने वाले असंध निवासी युवक के ऋण के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। उनके मोबाइल नंबर पर दो अलग-अलग नंबर से कॉल आई। कॉलर ने खुद को धनीफिन डॉट एप का प्रतिनिधि बताया। आरोपी ने उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाते की फोटो मांगी। पंजीकरण के नाम पर 2199 रुपये लिए और कहा कि दो लाख रुपये के ऋण को स्वीकृति के लिए भेजा है। रात में जब वे सो रहे थे तो सुबह तक उनके खाते से डेढ़ लाख रुपये निकल गए।
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केस-3

नौकरी के लिए ठगा गया एमटेक पास इंजीनियर

सेक्टर-32 के रहने वाले एक युवक के बैंक खाते से 95 हजार रुपये निकल गए। एमटेक पास युवक ने ऑनलाइन विज्ञापन देखने के बाद गुरुग्राम में नौकरी के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। आवेदन के लिए उनका ऑनलाइन इंटरव्यू भी हुआ। इस दौरान आरोपियों ने उनसे डिटेल में जानकारी ली। एक ऑफर लेटर भी जारी किया गया, इसके बाद ज्वाइनिंग की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए दस्तावेज लिए। लेकिन ज्वाइनिंग लेटर नहीं आया, दो दिन बाद कई ट्रांजेक्शन में उनके बैंक खाते से रुपये कट गए।
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