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गेहूं खरीद ः प्रशासन ने बदले नियम, कई मामलों में मिली छूट

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दो दिन से अनाज मंडियों में आ रही दिक्कतों को देखते हुए प्रशासन ने रणनीति बदल ली है और कुछ मामलों में किसानों और आढ़तियों को छूट प्रदान की है। बुधवार सुबह एसडीएम के साथ बैठक के बाद आढ़तियों ने हड़ताल खत्म कर खरीद शुरू कर दी है। प्रशासन ने आढ़तियों को आश्वस्त है कि है कि उनकी मांगों को पूरा किया जाएगा। इनमें एक सॉफ्टवेयर अपडेट करना और दूसरा जिन किसानों को मैसेज करना है वह लिस्ट आढ़ती तैयार करेंगे। इसके अलावा भाकियू के मांग पत्र को लेकर भी प्रशासन ने मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल को दोबारा खोल दिया है और जो किसान अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाए हैं, वे इस पर करा सकते हैं। यह पोर्टल पूरी खरीद तक चलेगा। जिन लोगों का रजिस्ट्रेशन नहीं है, उनकी फसल रजिस्टर्ड किसानों के बाद में खरीदी जाएगी। एक और अहम फैसला यह लिया गया कि अब हर खरीद सेंटर पर 100 के बजाए 150 किसान फसल बेचने आ सकेंगे।
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बता दें कि 20 अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू की गई थी। हालांकि दोनों दिन खरीद में कुछ दिक्कतें रहीं। मंगलवार को करनाल के आढ़तियों ने हड़ताल की घोषणा कर दी। इसके बाद बुधवार सुबह एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक ने मंडी प्रधान रजनीश चौधरी समेत अन्य आढ़तियों के साथ बैठक की और मांगों पर विचार किया। करीब आधे घंटे चली बैठक के बाद एसडीएम ने आढ़तियों की मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया। इसमें पोर्टल अपडेट करने की भी मांग शामिल रही। इसके बाद मंडी में सुचारू रूप से खरीद शुरू कर दी गई।
प्रदेश में खरीद में करनाल अव्वल
20 अप्रैल से प्रदेश में गेहूं की खरीद शुरू हो गई थी। हालांकि दो दिन से कभी आढ़तियों तो कभी किसानों को परेशानी झेलनी पड़ी। तमाम विवादों और अव्यवस्थाओं के बीच करनाल जिला प्रदेश में गेहूं खरीद में अव्वल है। पिछले दो दिन में प्रदेश में 28 लाख क्विंटल गेहूं खरीदा गया, इसमें से चौथा हिस्सा अकेले करनाल ने करीब 7 लाख क्विंटल गेहूं खरीदा। वहीं, बुधवार को एक ही दिन में जिले के 172 परचेज सेंटरों पर ही सात लाख क्विंटल गेहूं खरीदा गया।
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अब तक 65 हजार ने किया रजिस्ट्रेशन
जिले में करीब 80 हजार किसान हैं, जिनमें से 65 हजार किसानों ने पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाया है, जिन किसानों ने अब तक मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रजिस्टर नहीं किया है, उनको अवसर देते हुए अनाज मंडियों में दो विंडो खोली गई है, जिस पर वह अपना पंजीकरण करवा सकते हैं ताकि उन्हें अपनी फसल बेचने में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
डीसी ने किया निसिंग मंडी का दौरा, गेट पास और मैसेज जांचे
निसिंग। डीसी निशांत कुमार यादव ने बुधवार को निसिंग मंडी कानिरीक्षण कर आढ़तियों और किसानों के गेहूं खरीद कार्य की जानकारी ली। मंडी प्रधान सुभाष सिंगला, पूर्व प्रधान मुख्तार सिंह व आढ़ती वेदप्रकाश त्यागी ने उपायुक्त से बड़ी मंडी में किसानों की संख्या बढ़ाने बारे अनुरोध किया, उपायुक्त ने कहा कि आपकी मांग को पूरा कर दिया जाएगा। निरीक्षण के दौरान निसिंग अनाज मंडी के गेट पर उपस्थित ब्रास गांव के किसान प्रमोद कुमार के गेट पास व एसएमएस को चेक किया जोकि ठीक पाया गया। आढ़ती के स्टॉक रजिस्टर तथा कांटे पर गेहूं की बोरी का तोल भी चेक किया गया। इस अवसर पर करनाल के एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक, नायब तहसीलदार रामकुमार, मंडी सचिव सुमन लत्ता, सुपरवाइजर कर्ण सिंह उपस्थित रहे। डीसी ने बताया कि जिले में 172 स्थानों पर गेहूं खरीद का कार्य चल रहा है। प्रशासन द्वारा आढ़तियों व किसानों की मांग पर बड़ी मंडियों में किसानों की संख्या 100 से बढ़ाकर 150 करने का निर्णय लिया है। यदि किसी किसान की टोकन वाले दिन गेहूं नहीं कटती है तो वह रविवार मंडी में आकर बेच सकता है।
मेनुअल पास देने की मांग
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने डीसी को ज्ञापन सौंपा। इसमें मांग की गई कि किसानों को मेनुअली पास दिए जाएं। जैसे ही किसान की फसल कटे और वह मंडी में लाने के लिए तैयार हो उसे पास दिया जाए। दूसरा, जिन मनरेगा मजदूरों को मंडी में काम पर लगाया गया है, उनको शिफ्ट वाइज किया जाए, एक साथ इनसे ज्यादा काम न लिया जाए। मौके पर मेहताब कादियान समेत अन्य किसान मौजूद रहे।
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