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Karnal News: पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर टार्च की रोशनी में किया था हर्ष और बीरबल का एनकाउंटर

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करनाल। जिस हर्ष और बीरबल मुठभेड़ कांड पर सवाल उठाकर रोड़ समाज के लोग 25 दिन से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं, उसकी एफआईआर अब सामने आई है। इसके अनुसार, पुलिस दोनों का पीछा मुखबिर की सूचना पर कर रही थी। सबसे हैरानी की बात यह है कि घने अंधेरे में पुलिस ने दोनों के चेहरे टार्च की रोशनी में पहचाने। घोघड़ीपुर नहर पटरी पर टार्च की जरा सी रोशनी में ही दोनों ओर से गोलियां चलीं। अंधेरे में पुलिस का निशाना सटीक लगा और दोनों मारे गए। दूसरी ओर से एक गोली सब इंस्पेक्टर की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी। यह मुठभेड़ इसलिए भी सवालों के घेरे में है क्योंकि पुलिस ने गोली पैर पर नहीं मारी। इसकी जांच स्टेट क्राइम ब्रांच कर रही है।
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मधुबन थाने में यह एफआईआर (संख्या 282) 7 अगस्त की सुबह पांच बजकर नौ मिनट पर दर्ज इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार की तहरीर पर दर्ज की गई। इसके अनुसार, इंस्पेक्टर को मुखबिर ने सूचना दी थी कि त्रिशूल गैंग के दो बदमाश हर्ष निवासी गांव काला माजरा और बीरबल निवासी निवासी मटरवा खेड़ी कैथल मूनक से करनाल की तरफ आ रहे हैं। मुखबिर ने यह भी बताया कि इन दोनों ने ही एक दिन पहले पांच अगस्त को करनाल में बीरू वाल्मीकि की हत्या की है। इस पर दो गाड़ियों से 10 पुलिसवाले घोघड़ीपुर नहर पटरी पर पहुंचे। रात 11 बजकर आठ मिनट पर इंस्पेक्टर ने कंट्रोल रूम पर सूचना दी। इसके थोड़ी देर बाद बदमाश दिखाई दिए। पुलिस ने पीछा शुरू किया।
एक बाइक पर दो युवकों के नजर आते ही उन्हें रुकने का इशारा किया। वे नहीं रुके। बदमाशों का पीछा करते हुए ही पुलिस टीम की ओर से सीआईए-1 को 11 बजकर 10 मिनट पर मदद के लिए काल की गई। घोघड़ीपुर नहर पुल से 500 मीटर की दूरी पर पुलिस की टीम ने नाकाबंदी कर दी। बदमाश जैसे ही यहां पहुंचे, वैसे ही पुलिस देखकर वापस मुड़े। असंतुलित होकर उनकी बाइक फिसल गई। वे गिर गए। उनसे सरेंडर के लिए कहा गया तो गोली चलाने लगे। पुलिस टीम ने पहले तीन हवाई फायर किए। इसी बीच एक गोली सब इंस्पेक्टर मनोज कुमार की बुलेट प्रूफ जैकेट पर लगी। बदमाशों की ओर से 8-9 फायर किए गए। पुलिस ने जवाबी फायरिंग की। इसमें दोनों बदमाशों को गोलियां लगीं। उन्हें जिला अस्पताल ले गया। वहां डाक्टरों ने मृत बताया।
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भागते हुए बदमाशों को अंधेरे में कैसे पहचाना?
एफआईआर के मुताबिक मुखबिर पुलिस की गाड़ी में बैठा हुआ था। पुलिस को देखकर बदमाश भागने लगे। मुखबिर ने बाइक पर भागते बदमाशों को पहचान लिया। सवाल यह है कि बाइक पर भागते बदमाशों को पीछे से देखकर कैसे पहचाना जा सकता है? वह भी ऐसी जगह पर जहां अंधेरा हो। इस स्थान पर कोई स्ट्रीट लाइट नहीं लगी है। पुलिस ने लिखा है कि जब बदमाशों को रुकने का इशारा किया गया, उसी समय पर टार्च की रोशनी डाली गई। इसी समय मुखबिर ने उन्हें पहचान लिया। एफआईआर में इसका उल्लेख नहीं है कि मुखबिक पुलिस की गाड़ी में ऐसी कौन सी जगह बैठा था जहां से उसे बाहर का दृश्य नजर आ रहा था।
पुलिस की गोलियों का जिक्र नहीं
एफआईआर में बदमाशों की ओर से 8 से 9 राउंड फायर किए जाने का जिक्र है लेकिन पुलिस की ओर से चली गोलियों की संख्या नहीं बताई गई है। मुठभेड़ के बाद पुलिस अफसरों ने कहा था कि दोनों ओर से कुल मिलाकर 26 राउंड फायर किए गए। मुठभेड़ पर सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि पुलिस की ओर से गोलियां बदमाशों के पैरों पर क्यों नहीं मारी गईं? हर्ष और बीरबल को पेट, छाती और कंधे पर गोलियां लगी थीं।
यह था मामला
पांच अगस्त को बीरू वाल्मीकि की हत्या हुई थी। छह अगस्त को वाल्मीकि समाज के लोगों ने हत्यारों पर का्र्रवाई के लिए प्रदर्शन किया। एनकाउंटर की मांग की। रात में एनकाउंटर हो गया। पुलिस ने कहा कि हर्ष और बीरबल मुठभेड़ में मारे गए। दोनों बीरू की हत्या में शामिल थे। हालांकि बीरू की हत्या की एफआईआर में दोनों नामजद नहीं थे। हर्ष रोड़ समाज से और बीरबल सैन समाज से था। रोड़ समाज के लोग एनकाउंटर के फर्जी होने का दावा कर इसकी सीबीआई या जज से जांच कराने की मांग कर रहे हैं। सरकार ने जांच स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंपी है।


संतुष्ट नहीं, तभी कर रहे जांच की मांग :
समाज के लोग कह रहे हैं कि पुलिस को कैसे पता चला कि हर्ष और बीरबल ने ही बीरू की हत्या की? अगर यह मान भी लिया जाए कि उन दोनों ने हत्या की तो वे घटनास्थल से महज चार किलोमीटर दूर ही क्यों घूम रहे थे? और भी कई सवाल हैं, इसी वजह से इस मामले की जांच सीबीआई या हाईकोर्ट के जज से कराए जाने की मांग की जा रही है। एडवोकेट जितेंद्र चोपड़ा, प्रवक्ता, अखिल भारतीय रोड़ महासभा।
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हमने शिकायत के आधार एफआईआर दर्ज की थी। अब इस मामले की जांच स्टेट क्राइम ब्रांच देख रही है।
लखबीर सिंह, थाना प्रभारी, मधुबन
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