संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। अतिरिक्त सत्र न्यायधीश (फास्ट ट्रैक एनडीपीएस मामले) रितु की अदालत ने 20 ग्राम स्मैक के साथ पकड़ी महिला पर 12 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
अदालत ने फैसले में कहा कि 20 ग्राम स्मैक की मात्रा वाणिज्यिक नहीं है। इसलिए दोषी जेल की सजा की हकदार नहीं है। उसे बस एक सबक सिखाया जाना चाहिए। जो जेल की अवधि छह अक्तूबर 2022 से 16 नंवबर 2022 तक काटी है, यही काफी है। अब जुर्माना भरने पर उसे रिहा कर दिया है। छह अक्तूबर 2022 को सहायक निरीक्षक जसविंदर और अन्य पुलिस अधिकारियों ने
इंद्री क्षेत्र में रेड की थी। इस दौरान पुलिस टीम ने आरोपी रवीना को पकड़ लिया था। आरोपी रवीना के हाथ में पीले रंग के पर्स से 20 ग्राम स्मैक बरामद हुई थी। इस दौरान आरोपी अपने पास नशीला पदार्थ रखने का कोई लाइसेंस नहीं दिखा पाई थी। इंद्री थाना पुलिस में आरोपी की महिला के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत 6 अक्तूबर 2022 को प्राथमिकी दर्ज की थी।
इसके बाद महिला को अदालत में पेश किया गया और अदालत के आदेशानुसार कुछ समय बाद जमानत पर रिहा कर दिया। इसके बाद अदालत में चालान पेश किया गया। 28 अक्तूबर 2024 के ऑर्डर के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के सेक्शन 21 के तहत चार्ज फ्रेम किया गया। आरोपी ने खुद को बेकसूर बताया और ट्रायल का दावा किया।
आरोपी महिला को पुलिस ने हिरासत में लिया और उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। सजा पर फैसले के दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने दलील रखी की आरोपी महिला शादीशुदा है और उसके दो नाबालिग बच्चे हैं। वह गर्भवती है और मज़दूरी करती है। वह अपने पति से अलग रह रही है। वह पहले दोषी नहीं है। उसके खिलाफ कोई दूसरा केस पेंडिंग नहीं है। सजा कम करने की अपील की गई।
राज्य की ओर से पेश हुए ऋषि शर्मा ने भी बताया कि दोषी ने एक गंभीर जुर्म किया है और उसे ज़्यादा से ज़्यादा सज़ा मिलनी चाहिए। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुनाया कि आरोपी रविना से बरामद स्मैक की मात्रा 20 ग्राम है, जोकि वाणिज्यिक नहीं है। जिससे पता चलता है कि दोषी नशीले पदार्थ के व्यापार में शामिल नहीं है। इसलिए वह जेल की सजा की हकदार नहीं है। उसे बस एक सबक सिखाया जाना चाहिए, जो दोषी को अपनी जेल की अवधि के दौरान यानि 6 अक्तूबर 2022 से 16 नवंबर 2022 तक उसे मिली है। इसलिए उसकी उम्र को देखते हुए, उसे ज़्यादा समय तक खतरनाक अपराधियों के साथ रखने से वह जुर्म की दुनिया में शामिल हो सकती है। इसलिए उसे हिरासत में भेजना सही नहीं है। अदालत ने दोषी पर 12 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसके अलावा दोषी ने 6 अक्तूबर 2022 से 16 नवंबर 2022 तक जेल काटी है। इसलिए अब दोषी को रिहा करने के आदेश जारी किए।