सेक्टर 32-33 के मैदान में रविवार को कर्ण कैनल क्लब की ओर से आयोजित राष्ट्रीय ऑल ब्रीड चैंपियनशिप डॉग शो में हरियाणा, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, पंजाब, मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र से लोग अपने नस्ली डॉग लेकर पहुंचे। करीब 280 प्रतिभागी इस शो में पहुंचे। अलग-अलग उत्कृष्ट नस्लों के डॉग की प्रतियोगिताएं करवाई गई, जिनमें बेस्ट ऑफ ब्रीड के पुरस्कार के लिए चयन किया गया। दर्शकों के लिए यह डॉग शो आकर्षण का केंद्र बना। प्रतिभागी अलोक नंदा के डॉग ने दोेनों रिंग में बेस्ट शो जीते हैं। जज के फैसले के बाद नंदा को सम्मानित किया गया।
दिल्ली के रूपनगर निवासी रियल इस्टेट व्यवसायी अलोक नंदा को बचपन से डॉग पालने का शौक है। उनके पास विभिन्न नस्लों के 45 डॉग हैं। जर्मन की पोमेरौनियन नस्ल टॉय ब्रीड उनकी सबसे पसंदीदा है। खूबसूरती की वजह से यह नस्ल खास पहचान रखती है। उनके दादा आईडी नंदा मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस में थे। 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद उसी साल उनके दादा घर में जर्मन स्पेट्स नस्ल का डॉग लाए थे और उसका नाम भुट्टो रखा। अलोक नंदा का जन्म 1967 में हुआ। बचपन में वह घर में डॉग के साथ खूब खेला करते थे। तभी उनके मन में डॉग के प्रति गहरा लगाव हो गया। उनका कहना है कि पोमेरौनियन नस्ल के बच्चे की कीमत पांच लाख से शुरू होती है। वह ब्रीडिंग या बेचने के लिए नहीं बल्कि अपने शौक के लिए डॉग पालते हैं।
इंडियन चैंपियन रह चुका मैक्स पहुंचा शो में
जर्मन स्पीड्स नस्ल का मेल डॉग मैक्स भी रविवार को डॉग शो में लाया गया। डेढ़ साल के इस डॉग ने दर्शकों को आकर्षित किया। उसके साथी सीटू नस्ल के डायमंड ने भी जलवा बिखेरा। इनके मालिक लुधियाना निवासी गुरजेंद्र सिंह ने बताया कि वह शौक से डॉग पालते हैं। उनका डॉग ब्रीडिंग का व्यवसाय है। यह दोनों नस्लें कोई विशेष देखभाल नहीं मांगती। इन्हें फीड, मीट, पनीर, अंडा व सामान्य खाना देकर पाला जा सकता है। सतर्क इतना कि घर पर चिड़िया भी पर मारे तो एकदम शोर मचा देते हैं। इन नस्ल का बच्चा 20 से 25 हजार रुपये में मिलता है।