10 से 12 कुत्तों ने बोला हमला
मूल रूप से बिहार निवासी श्रमिक दिलीप यहां कई वर्षों से परिवार के साथ रहते हैं। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियों के अलावा 10 साल का एक बेटा आदित्य भी था। उन्होंने बताया, वसंत पंचमी के अवसर पर रविवार की शाम उसका इकलौता बेटा आदित्य पतंग उड़ा रहा था। इसी दौरान उसे एक पतंग कटकर खेतों की तरफ जाती दिखी तो वह उस पतंग उठाने के लिए उसके पीछे चला गया। गेहूं के खेतों में पहुंचने पर वहां मौजूद 10 से 12 लावारिस कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया।
सिर व पैर नोचा
कुत्तों ने उसका सिर व पैर पूरी तरह से नोच डाले। इतना ही नहीं उसे कुछ दूरी तक उसे खींचकर भी ले गए। देर शाम तक जब आदित्य घर नहीं लौटा तो परिवार के लोगो को चिंता हुई। परिजन ग्रामीणों के साथ बच्चे को ढूंढने के निकल पड़े। वह कहीं नहीं मिला। इसके बाद ग्रामीणों को खेतों की तरफ से कुत्तों के भौंकने आवाज लगातार सुनाई दे रही थी। वहां पहुंच कर देखा तो आदित्य का क्षतविक्षत शव गेहूं के खेतों में पड़ा हुआ था। कुत्तों ने उसे बुरी तरह से नोचा था। जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे थे तब भी कुत्ते उसे नोच रहे थे। बच्चे की हालत देख माता-पिता बेहोश हो गए। ग्रामीणों ने उन्हें संभाला और पुलिस को उसकी सूचना दी।
पशुओं को भी बना चुके हैं निशान
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में 10 से 12 लावारिस कुत्ते हैं। उन्होंने पहले भी कई पशुओं को काटा है। इन्हें गांव से निकाला जाना चाहिए। ये कुत्ते गांव के दूसरे बच्चों के लिए खतरा हैं। गांव के सरपंच हंसवीर का कहना है कि प्रशासन अगर इन कुत्तों के बारे में कोई व्यवस्था नहीं करता है तो पंचायत अपने स्तर पर फैसला लेगी।
दस साल के बच्चे को कुत्तों द्वारा नोच-नोच कर मारने की सूचना आई थी। शव का पोस्टमार्टम करा दिया है। इसकी जांच की जा रही है। -दीपक कुमार, घरौंडा थाना प्रभारी।