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डॉलर की मजबूती से चावल निर्यातकों को फायदा

Fri, 14 Jun 2013 05:30 AM IST
Karnal
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कैथल। डॉलर की रुपये के मुकाबले मजबूती से चावल निर्यात उद्योग की सेहत सुधर सकती है। हालांकि अधिकतर चावल निर्यातक पहले ही अपने डॉलर बेच चुके हैं। लेकिन जिन निर्यातकों ने एडवांस में डॉलर बिक्री नहीं की है, उनकी इस समय चांदी हो रही है। चावल निर्यातक इस मजबूती के दूरगामी परिणाम देख रहे हैं। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि निर्यात होने वाले बासमती धान की कीमतों में आने वाले समय में तेजी रहेगी। इसका फायदा किसानों को भी मिलेगा।
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कई निर्यातकों को होगा फायदा
हाल ही के दिनों में आई डॉलर की मजबूती रिकार्ड स्तर पर पहुंच गई है। यह धान के सीजन के समय में 53 रुपये प्रति डॉलर से बढ़कर इस समय 58 रुपये 13 पैसे तक पहुंच गई है। ऐसे में जिन निर्यातकों ने पहले एडवांस में अपने डॉलर नहीं बेचे हैं, उन्हें करीब 5 से 8 प्रतिशत तक लाभ होगा। जिले से बासमती ग्रुप का चावल अधिकतर निर्यात होता है। इसमें परंपरागत बासमती, 1121 सहित डुप्लीकेट बासमती का चावल अधिकतर निर्यात होता है। ऑल इंडिया राइस एक्सपोटर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया के मुताबिक अधिकतर राइस एक्सपोटर्स चावल के सौदे के समय ही डॉलर को बेच देते हैं। कई निर्यातक ओपन में भी सौदे करते हैं। इस कारण अब उन निर्यातकों को करीब 5 से 8 प्रतिशत अतिरिक्त लाभ होगा, जिन्होंने पहले डॉलर बिक्री नहीं की है। देश भर से प्रति माह लगभग 3 लाख 50 हजार टन चावल निर्यात होता है। निश्चित रूप से कई निर्यातकों को डॉलर की मजबूती का लाभ मिलेगा।

धान की कीमत में तेजी
ऑल इंडिया राइस एक्सपोटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र पाल जिंदल ने कहा डॉलर की मजबूती से आने वाले सीजन में धान की कीमत में फर्क पड़ेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि डॉलर की मजबूती से कम से कम यह 5 प्रतिशत तक निश्चित रूप से बढ़ेगी। पिछले सीजन में 1121 औसतन 2800 से 3000 रुपये तक बिकी थी। आने वाले सीजन में इसकी अधिक कीमत मिल सकती है। निर्यातक महेंद्र जिंदल के मुताबिक डॉलर में आई मजबूती से जिन निर्यातकों को लाभ नहीं हुआ, उन्हें नुकसान भी नहीं हुआ। दरअसल उन्होंने उस समय के हिसाब से सही सौदे किए हुए हैं।
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