कैथल। फसल खरीदने पर 72 घंटे के अंदर उसका भुगतान करने का प्रदेश सरकार का आदेश इस सीजन में सिरे नहीं चढ़ पा रहा है। क्योंकि अनाजमंडी में आढ़तियों के करीब 34 करोड़ रुपये खरीद एजेंसियों के पास फंसे हुए हैं। 72 घंटे तो दूर एक-एक महीने से आढ़तियों को भुगतान नहीं हो पाया है। आढ़तियों को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं वर्ष 2000 की तरह धान घोटाला साबित करके उनकी पैसे को रोक न लिया जाए।
कैथल मंडी सहित जिले की अन्य मंडियों से सरकारी खरीद एजेंसियों ने किसानों का धान खरीदा है जिसका भुगतान हरियाणा सरकार के आदेशानुसार 72 घंटे के अंदर दिया जाना था। खरीद एजेंसियों ने 28 अक्तूबर तक की खरीद का भुगतान तो कर दिया गया लेकिन उसके बाद की फसल का भुगतान नहीं किया, जिसकी राशि करोड़ों में बैठती है। वर्ष 2000 में भी जब 15-20 दिन तक किसानों के धान का भुगतान नहीं हुआ था तो उस समय भी सरकार द्वारा धान घोटाला कहकर किसानों की फसल का भुगतान आढ़तियों के माध्यम से रोक लिया था जो कई साल तक लटका रहा और इसका खामियाजा आढ़तियों को भुगतना पड़ा था।
किसान ब्याज भी मांगने लगे
आढ़ती रामनारायण, ऋषिपाल और सतनारायण आदि ने बताया कि सरकार को किसानों के धान का भुगतान शीघ्र करना चाहिए क्योंकि किसान उनसे अब अपनी फसल का एक महीने का ब्याज भी मांगने लगे हैं। उधर मंडी प्रधान सुरेश मितल ने बताया कि इस समय मंडी में लगभग 30-35 करोड़ रुपये रुके पड़े हैं। इस संबंध में आढ़तियों के साथ डीएफएससी, हरियाणा एग्रो, हरियाणा वेयर हाउस के उच्च अधिकारियों से भी मिल चुके है लेकिन एक ही जवाब मिलता है कि सरकार के पास अभी पैसा नहीं है। पैसा आने पर किसानों भुगतान कर दिया जाएगा।
सरकार को बताया है : सुरेंद्र सैनी
जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक सुरेंद्र सैनी ने कहा कि सीजन शुरू होने से पहले एजेंसियों के सामने पेमेंट की डिमांड रखी जाती है जो पिछले वर्ष की तुलना में प्वाइंट 25 प्रतिशत अधिक तक की कर सकते है। अबकी बार किसानों की फसल पिछले वर्ष की अपेक्षा प्वाइंट 60 प्रतिशत अधिक आ चुकी है जिस कारण से यह समस्या आई है। उच्च अधिकारियों के माध्यम से प्रदेश सरकार से 34 करोड़ की मांग कर रखी है, जैसे ही यह राशि आएगी मंडी में भुगतान कर दिया जाएगा।