कुरुक्षेत्र। शहर के छोटा बाजार के समीप बने एक मकान की छत मंगलवार देर रात अचानक गिर गई। छत गिरने से एक ही परिवार के दो सदस्य मलबे में दब गए। पड़ोसियों की मदद से एक लड़की को तुरंत निकाल लिया गया, लेकिन सात माह की बच्ची ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इसके अलावा हजारों रुपये का सामान भी मलबे के नीचे दब गया। हालांकि परिवार द्वारा बच्ची का पोस्टमार्टम नहीं करवाया गया। मंगलवार को दिन भर चली हलकी बारिश के कारण कई वर्ष पुराने मकान की छत अचानक ढह गई। मकान ढहने से 17 वर्षीय सपना और 7 माह की उसकी भतीजी शैली मलबे के नीचे दब गई। इसके साथ-साथ घर में बने तीन कमरों में से एक कमरे की छत भी नीचे खिसक गई। मृतक बच्ची का पिता सन्नी एक कपड़े की दुकान पर कार्य करता है। छत गिरते ही चीखें और पुकारों की आवाजें आसपास वालों ने सुनी, जिसके बाद पड़ोसियों की मदद से बच्ची की बुआ को तो निकाल लिया गया, परंतु 7 माह की भतीजी मलबे के नीचे दब गई। बड़ी मशक्कत के बाद बच्ची को निकाला गया, लेकिन तब तक बच्ची की मौत हो चुकी थी। बच्ची के पिता सन्नी ने बताया कि वे लोग घर के बाहर बैठे थे। शैली को सुलाने के बाद उनकी बहन सपना उसे अंदर बेड पर सुलाने गई, तभी छत अचानक गिर गई। सन्नी ने बताया कि उनकी पत्नी और बच्ची की मां शिवानी अपने मायके गई हुई है। इस मंजर को देखकर सन्नी की मां बेहोश हो गई। सन्नी की माता बार-बार केवल शैली को ही पुकारती रही।
भाई और बेटा-बेटी बाल-बाल बच गए
जिस कमरे में यह हादसा हुआ ठीक उसके साथ लगते कमरे में सन्नी के भाई दीपक अपने 3 वर्षीय बेटे सक्षम और 1 वर्षीय बेटी शीतल के साथ सो रहे थे। पहले कमरे की छत गिरते ही दूसरे कमरे की छत भी नीचे खिसक गई, तभी सूझबूझ के साथ दीपक ने बच्चों को बाहर निकाला और छत को अन्य लकड़ी के पिल्लरों की स्पोर्ट लगाकर रोका।
इससे भी बड़ी हो सकती थी अनहोनी
मृतक बच्ची के पिता सन्नी ने बताया कि यह अनहोनी यदि और अधिक रात को घटती तो एक नहीं कई परिवार के सदस्यों को नुकसान उठाना पड़ता। सन्नी के अनुसार जिस कमरे की छत गिरी है वहां पर वे परिवार के सात सदस्य सोते हैं, जिनमें वे खुद व उनकी मृत बेटी शैली, बेटा नतिन, छोटा भाई गोल्डी और मन्नी, बहन सपना और माता शामिल है।
काफी खस्ता हालत में है मकान
सन्नी ने बताया कि उनके दादा अपने परिवार के साथ 1947 में भारत-पाक विभाजन होने पर कुरुक्षेत्र आए थे और तब से उनका परिवार इसी मकान में रहता है। एक व्यक्ति के साथ कोर्ट में केस चलने के कारण वे इस मकान की छत को ठीक नहीं करवा पाए थे। जब भी वे घर को दुरुस्त करने की कोशिश करते थे, तो विरोधी पार्टी वाले पुलिस को कार्रवाई के लिए भेज देते थे, जिसके कारण छत को नहीं बदलवाया गया।
पार्षद ने परिवार को बंधाया ढांढस
पार्षद नरेंद्र शर्मा निंदी ने मौके पर पहुंचकर परिवार वालों को ढांढस बंधाया। इसके अलावा मौके का जायजा लिया। पार्षद निंदी शर्मा देर रात तक परिवार के साथ ही प्रत्येक कार्य में साथ खड़े रहे।