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मेडिकल कालेज में आगामी दस दिनों में शुरू हो जाएगी एमआरआई मशीन

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मेडिकल कॉलेज में आगामी दस दिनों में शुरू हो जाएगी एमआरआई मशीन
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए अब रात से लाइन में नहीं लगना पड़ेेगा और न अल्ट्रासाउंड के लिए लाइन में लगना पड़ेगा। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में दो अल्ट्रासाउंड मशीनें आ चुकी हैं और एक एमआरआई (मेग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) मशीनें आ गई हैं। इनमें से एक अल्ट्रासाउंड मशीन को इंस्टॉल कर शुरू भी कर दिया है। मेडिकल कॉलेज के बेसमेंट में एक्सरे के साथ अल्ट्रासाउंड भी होने शुरू हो गए हैं। इससे अलग आगामी 10 दिनों में अल्ट्रासाउंड की दूसरी मशीन व एमआरआई मशीन भी शुरू होने वाली है। मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों का कहना है कि एमआरआई व अल्ट्रासाउंड मशीन शुरू करने के लिए बेसमेंट में कार्य चला हुआ है। जल्द ही यह कार्य पूरा हो जाएगा और फिर दोनों मशीनों को शुरू कर दिया जाएगा। बता दें कि फिलहाल सरकारी अस्पताल में मेडिकल कालेज में एमआरआई की सुविधा नहीं है, लोगों को इसके लिए निजी लैब पर महंगे टेस्ट कराने पड़ते हैं। एमआरआई मशीन शुरू होने लोगों को राहत मिलेगी, साथ ही सरकार के निर्धारित कम से कम दरों पर ये टेस्ट किये जाएंगे।
नंबर लगवाने के लिए रातभर गर्भवती महिलाएं व परिजन करते इंतजार
सीएम सिटी में गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड को लेकर सबसे बड़ी समस्या थी। क्योंकि गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए रातभर मेडिकल कॉलेज में ही इंतजार करना पड़ता था, क्योंकि सुबह ओपीडी ब्लॉक खुलते ही अल्ट्रासाउंड के लिए पर्ची देकर नंबर लगाया जाता था। क्योंकि एक दिन में 20 गर्भवती महिलाओं का ही अल्ट्रासाउंड किया जाता था। लेकिन अब अल्ट्रासाउंड के लिए मेडिकल कॉलेज में दो मशीने र एक मशीन सरकारी अस्पताल में है। इस लिए अब गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अब गर्भवती महिलाओं को पर्ची पर पहले ही डेट दी जाती है कि उस दिन अल्ट्रासाउंड होगा।
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एमआरआई के लिए चुकानी होगी फीस
मेडिकल कॉलेज में एमआरआई मशीन शुरू होने पर मरीजों को इसकी फीस चुकानी होगी। जो अभी निर्धारित नहीं हुई है। मेडकिल कॉलेज की ओर से फीस निर्धारित करने के लिए चंडीगढ़ फाइल भेजी हुई है। एमआरआई कराने के लिए मेडिकल कॉलेज में दाखिल मरीज को अलग फीस और ओपीडी में आए मरीज को अलग फीस देनी होगी, तभी उस मरीज की एमआरआई होगी। फीस को लेकर अन्य मेडिकल कालेजों की दरों को भी लागू किया जा सकता है और उससे कम भी फीस रखी जा सकती है।
ये होती है एमआरआई
मेग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) सबसे आधुनिक और शरीर के अंदरूनी अंगों की तस्वीर लेने वाली अनोखी टेक्नोलॉजी है। इससे डॉक्टरों को बिना चीर-फाड़ किए शरीर के अंदर हुई गड़बडिय़ों को पकडने का मौका मिल जाता है। एमआरआई टेक्नोलॉजी में ताकतवर चुंबकीय और रेडियो तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है ताकि शरीर में प्राकृतिक रूप से मौजूद चुंबकीय तत्वों के सामंजस्य से अंदरूनी अंगों की तस्वीर ली जा सके और पता लगाया जा सके कि मरीज के किसी अंग में दिक्कत है।
शरीर के किसी भी अंग की करा सकते हैं एमआरआई
रेडियोलाजिस्ट डा. इकबाल सिंह का कहना है कि एमआरआई से पूरे शरीर यानी सिर से लेकर पांव तक की जांच की जा सकती है। यही नहीं त्वचा के ऊपरी हिस्से से लेकर शरीर की गहराई में छिपे अंगों तक इस मशीन की पहुच है। इस पद्धति से तस्वीर लेने में हड्डियों, भारी मांसपेशियों आदि का असर नहीं होता जबकि दूसरी किसी अन्य टेक्नोलॉजी से ली गई तस्वीरें उक्त समस्याओं के कारण खराब आती हैं। एमआरआई से शरीर के किसी भी हिस्से के, किसी भी स्तर की तस्वीरें ली जा सकती हैं। एमआरआई की जांच में दूसरे परीक्षणों के मुकाबले अधिक खर्च करना पड़ता है
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मेडिकल कॉलेज में दो अल्ट्रासाउंड मशीन व एक एमआरआई मशीन आ चुकी है। इनमें से एक अल्ट्रासाउंड मशीन बेसमेंट में शुरू कर दी है, जिससे मरीजों के अल्ट्रासाउंड किए जा रहे हैं। जल्द ही दूसरी अल्ट्रासाउंड मशीन व एमआरआई मशीन को भी शुरू कर दिया जाएगा। बेसमेंट में पर्श का निर्माण कार्य चला हुआ है।
-डॉ. मुनीष पुरूथी, डीएमएस, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज करनाल।
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