73 निजी बसों के मार्ग बदलने के बाद उक्त मार्गों पर बसों की संख्या घट गई है। इन मार्गों पर बसों की संख्या बढ़वाने की मांग को लेकर निजी बस संचालक वीरवार को रोडवेज महाप्रबंधक रविंद्र पाठक को मिले।
निजी बस संचालकों का कहना है कि पुराने मार्गों से 73 बसें हट गई हैं, लेकिन रोडवेज वहां पर बस नहीं चला रहा है। इससे सवारियां परेशान हैं।
इसके अलावा जो मार्ग निजी बस संचालकों को अब मिले हैं वहां से भी रोडवेज बसों की संख्या कम नहीं है। इससे रोडवेज और निजी बस संचालकों को नुकसान हो रहा है।
दूसरी तरफ रोडवेज कर्मचारियों का कहना है कि किसी मार्ग पर बसों की संख्या कम है तो सवारियाें को शिकायत करनी चाहिए।
निजी बस संचालक अपने मुनाफे के लिए अब लांग रूट से भी रोडवेज बसों को बंद करवाने में लगे हैं। निजी बस संचालकाें की ऐसी तानाशाही कतई सहन नहीं की जाएगी।
महाप्रबंधक कार्यालय के बाहर बैठे निजी बस संचालक यशपाल पोसवाल, जसमेर बड़थल, तरसेम, धर्म सिंह, विजय पाल राणा, शीशपाल राणा सहित अन्य ने बताया कि सरकार ने निजी बसों को नये टाइम टेबल पर चलने की परमिशन दे दी है। इसके बाद निजी बसें पुराने मार्गों को छोड़ आई हैं।
अब नए मार्गों पर उतनी ही बस चल रही हैं जितनी पहले चलती थी। महाप्रबंधक से मांग है कि जितनी निजी बसें जिस-जिस मार्ग पर आई हैं उसी हिसाब से उक्त मार्गों से रोडवेज बस कम की जाए।
दूसरी तरफ रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रधान रामनिवास शर्मा का कहना है कि निजी बस संचालक मनमानी कर रहे हैं। जहां पर बसें कम हैं उक्त मार्ग की सवारियों को शिकायत करनी चाहिए।
सभी मार्गों पर बेहतर बस सर्विस है और असंध मार्ग पर रोडवेज बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए।