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जैविक खेती तथा देसी गाय को कृषि प्रणाली का अभिन्न अंग बनाना होगा - धनखड

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की क्षेत्रीय समिति की 25वीं बैठक केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान में हुई, जिसका उद्घाटन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने किया। बैठक में हरियाणा, पंजाब व दिल्ली राज्यों की कृषि, पशुपालन, मछली पालन, उद्यान व वानिकी से संबंधित विषयों की समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया। समस्याओं की पहचान, अनुसंधान शिक्षा एवं प्रसार मुद्दों की प्राथमिकताओं को देखते हुए रणनीति बनाने का कार्य शुरू हुआ। इस समिति में लगभग 150 कृषि वैज्ञानिक, नीति निर्धारक, कृषक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की गवर्निंग बाडी के सदस्य, परिषद के संस्थानों के निदेशक, आयुक्त कृषि मंत्रालय भारत सरकार, कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, तकनीकी कार्यकर्ता, प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा मन की बात कार्यक्रम में चर्चा किये गये पंजाब के धरती पुत्र सरदार गुरबचन सिंह को फसल अवशेष न जलाने के लिए इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तथा अध्यक्ष द्वारा सम्मानित किया गया। कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने स्थानीय समस्याओं को कृषि अनुसंधान का विषय बनाने पर जोर दिया तथा बताया कि खेती से होने वाली आय में आर्थिक आत्मनिर्भता जरूरी है। कृषि की समगतिशीलता को बढ़ाने के लिए फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ जैविक खेती तथा देसी गाय को कृषि प्रणाली का अभिन्न अंग बनाना होगा। किसानों की आय में सार्थक वृद्धि के लिए सामुहिक प्रयास के साथ-साथ बिचौलियों से मुक्ति तथा ई-विपणन और फसल तथा पशुपालन पर राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण नीतियों का विकास किया है तथा लागू भी किया है जिससे कृषकों को फायदा हो रहा है।
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इस वर्ष पराली जलाने में 45 प्रतिशत की आई कमी
समिति के अध्यक्ष डॉ. त्रिलोचन महापात्र, महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा सचिव डेयरी, नई दिल्ली ने बताया कि परिषद ने पंजाब, हरियाणा तथा दिल्ली राज्यों की कृषि, पशुपालन तथा मछली पालन की कई समस्याओं का हल दिया है। ये तीनों राज्य देश की कुल चावल तथा गेहूं उत्पादन में करीब 20 प्रतिशत का योगदान देते हैं इसलिए इस क्षेत्र की समस्याओं का समसामयिक विश्लेषण तथा प्रभावी नीति बनाने की आवश्यकता है जिसके लिये हम आज यहां एकत्रित हुए हैं। 2017-18 में धान की पराली जलाने में 45 प्रतिशत की कमी आई है। परिषद के संस्थानों के प्रयासों द्वारा लवण से प्रभावित जमीनों को समुचित प्रबंधन एवं उनसे फसल उत्पादन लेना, करीब 14 लाख कृषकों को प्रशिक्षण देना तथा करीब 2 करोड़ किसानों के साथ समसामयिक समस्याओं पर चर्चा एवं कुल 150 कृषि जानकारी संबंधी मोबाइल एप विकसित किए हैं।
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घी व दूध में मिलावट में कमी लानी होगी
हरियाणा सरकार के सहायक मुख्य सचिव (पशुपालन एवं डेयरी विकास) एसके गुलाटी ने बताया कि गुणवत्ता सुधार करने के लिए अनुसंधान संस्थानों को घी में मिलावट रोकने के लिए नए तकनीकी का विकास करने की जरूत है। साथ ही साथ दूध में मिलावट को कम करने हेतु दुग्ध उत्पादों को गांव स्तर पर ही गुणवत्ता युक्त उत्पादों का विकास करना चाहिए।
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