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सीएम सिटी बनाम धरना सिटी

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सीएम सिटी बनाम धरना-प्रदर्शन सिटी
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-रोजाना औसतन हो रहे सरकार के खिलाफ दो प्रदर्शन
-सीएम कैंप हाउस पर परमानेंट सुरक्षाकर्मी तैनात, प्रशासन की बंद रही चक्करघन्नी
फोटो संख्या-1
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। सीएम सिटी को अब अगर प्रदर्शन व धरना सिटी बनती जा रही है। पिछले ढाई साल से करनाल सीएम सिटी है, लेकिन अब यह धीरे धीरे कर्मचारियों, किसानों, व्यापारियों व अन्य संगठनों के लिए आक्रोश प्रकट करने वाला स्थल बनता जा रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो शहर में रोजाना औसतन एक से दो प्रदर्शन हो रहे हैं, इसके अलावा धरने भी चल रहे हैं। बढ़ने धरना प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से सेक्टर 12 ग्राउंड रैली के लिए चिह्नत किया गया है, साथ ही सीएम कैंप आफिस पर परमानेंट सुरक्षा कर्मचारी तैनात किये गए हैं। बावजूद इसके प्रशासन की चक्कर घिन्नी बनी हुई है, क्योंकि हर संगठन सीएम कैंप आ वास का घेराव करने पहुंच जाता है। कभी सफाई कर्मचारी सड़कों पर होते हैं, तो कभी ग्रामीण चौकीदार। रोडवेज, पीडब्यडूडी मेकेनिकल समेत अन्य विभागों के कर्मचारी रोजाना सड़कों पर उतर रहे हैं और सरकार के खिलाफ झंडा बुलंद कर रहे हैं। अध्यापकों समेत रिटायर्ड व पेंशन धारी कर्मचारी आंदोलन को मजबूर हो रहे हैं।
सोमवार की बात करें तो एक तरफ लघु सचिवालय के सामने भारतीय किसान यूनियन के सदस्यों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला, वहीं सेक्टर 12 में ही नौकरी की भीख मांगने आए जेबीटी टीचर्स ने अनशन किया। इसके अलावा रिटायर्ड कर्मचारी संघ व सर्व कर्मचारी संघ ने अलग अलग स्थानों पर मांगों को लेकर रोष जाहिर किया। उधर, धरनों और प्रदशनों को लेकर जिला प्रशासन समेत पुलिस को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। पिछले एक सप्ताह से पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सड़क पर ही तैनात रहते हैं। पुलिस की बात करें तो बकायदा पानी की बौछारें करने के लिए स्पेशल वाहन तैनात किया गया व आसूं गोलों की भी व्यवस्था की गई, ताकि अनियंत्रित होती स्थिति को काबू किया जा सके। वहीं, दिनभर कर्मचारियों व अन्य संगठनों के प्रदर्शनों को काबू करने के लिए अफसरों द्वारा आफिस से बाहर रहने से जनता के कार्यों पर भी असर पड़ रहा है।
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एमपी का करनाल में भी असर, आंदोलन शुरू
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में किसानों के निर्णायक आंदोलन के बाद हरियाणा में भी किसानों ने सोमवार से प्रदेश के सभी मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन के माध्यम से आंदोलन शुरू कर दिया। यह धरने प्रदर्शन 14 जून तक जारी रहेंगे। कर्ज माफी और स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग को लेकर यह आंदोलन उत्तर भारत में तेज हो रहा है। सोमवार को सीएम सिटी करनाल में किसानों का धरना आंदोलन जिला मुख्यालय मिनी सचिवालय के सामने शुरू हुआ। इससे पहले किसानों ने महात्मा गांधी चौक पर गांधी की प्रतिमा के सामने देश में शांति की कामना तथा मध्यप्रदेश के मंदसौर में पुलिस की गोली से मारे गए किसानों की आत्मा की शांति के लिए शांतिपाठ किया। इसके बाद किसानों ने शांतिपूर्ण ढंग से रोष मार्च निकाला। मध्यप्रदेश सरकार के साथ किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की गई। विभिन्न मार्गों से होते हुए किसान सैक्टर 12 में मिनी सचिवालय के सामने पहुंचे वहां पर उन्होंने धरना शुरू किया। धरनास्थल पर किसानों का नैतृत्व भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने किया। किसानों की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष बाबू राम बड़थल ने की। यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी किसानों को उनका हक नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग किसानों के मसीहा बन कर किसानों के हितों को राजनेताओं के यहां गिरवीं रख रहे हैं। ऐसे नेताओं से बचें। हरियाणा में भी प्रदेश सरकार किसानों को सम्पूर्ण रुप से कर्ज मुक्त करे। इस अवसर पर प्रेमचंद शाहपुर, श्याम सिंह मान, शीश पाल, राजेद्र दादूपुर, विनोद राणा, जोगेंद्र सिंह झिंडा उपस्थित थे।
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जंतर मंतर परसरकार को ललकारेंगे किसान
15 जून को देश भर के किसान मोदी सरकार को ललकारेंगे। किसानों द्वारा जंतर मंतर पर धरना दिया जाएगा। मंदसौर में किसानों की गोलीबारी में मौत, महाराष्ट्र में किसान आन्दोलन, भाजपा सरकार की किसान विरोधी दमनकारी नीतियों के विरोध में देशभर के किसान 15 जून को जंतर-मंतर दिल्ली में एकत्रित होंगे। यहां पर वह प्रदर्शन भी करेंगे। इसका नेतृत्व राष्ट्रीय नेता नरेश टिकैत करेंगे। एक दिवसीय धरने में किसानो की बदहाली की तरफ देश भर का ध्यान आकर्षित किया जाएगा। वहीं, 16 जून से तीन दिवसीय हरिद्वार में चिंतन शिविर होगा।
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रिटायर्ड कर्मचारियों ने भरी हुंकार, 14 को धरना
करनाल। मांगों को पूरा कराने को लेकर रिटायर्ड कर्मचारी संघ ने फिर से झंडा उठा लिया है। संघ ने फैसला लिया है कि सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू कराने को लेकर 14 जून को धरना दिया जाएगा और सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। संघ के सचिव धीरज सिंह ने बताया कि बोर्ड, निगम, नगर पालिका व विश्वविद्यालयों के सेवा निवृत कर्मचारियों को साँतवा वेतन आयोग का लाभ नहीं दिया गया है जिसके कारण वरिष्ठ नागरिकों में काफी रोष व्याप्त है। धरना को कामयाब बनाने के लिए करनाल के सभी छ: ब्लाकों में टीम का गठन किया गया है, ताकि टीम के सभी सदस्य सेवा निवृत कर्मचारियों के घर-घर में जाकर उन्हें धरने में भाग लेने के लिये प्रेरित करें। सोमवार को धरने को लेकर एक एक टीम से बात की गई व जिम्मेदारी तय की गई। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक संघ संघर्ष करता रहेगा।
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शिक्षकों के अपमान पर जताया रोष
करनाल। सर्व कर्मचारी संघ ने रविवार को जेबीटी शिक्षकों के साथ हुए बर्ताव पर कड़ा रोष जाहिर किया है। संघ ने चेताया है कि कर्मचारियों के साथ ऐसा व्यवहार कतई बर्दास्त नहीं किया जाएगा। सोमवार को संघ की बैठक कर्ण गेट स्थित कार्यालय में हुई। बैठक में पुलिस द्वारा जेबीटी शिक्षकों का अपमान करने की कड़े शब्दों में निंदा की गई। रविवार को जेबीटी शिक्षक आवाज को सीएम तक पहुंचाने के लिए करनाल पहुंचे थे। बैठक की अध्यक्षता कर रहे संघ के जिला प्रधान ओमप्रकाश सिहमार ने कहा कि पुलिस ने महिला शिक्षकों को सडक़ों पर घसीटा, जोकि घोर निंदनीय है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले वायदे करती है और बाद में मुकर जाती है। जेबीटी शिक्षकों की उ मीदों पर सरकार पानी फेरने का काम न करे। सचिव कृष्ण शर्मा व सह सचिव सुशील गुर्जर ने कहा कि शिक्षकों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लोकतंत्र में अपना हक मांगना कोई गुनाह नहीं है। शिक्षक समाज की अहम कड़ी है। उन्हें स मान दिया जाना चाहिए। इस अवसर पर जगतार, अनिल सैनी, सतपाल सैनी, अंजु मोर, रोशनलाल गुप्ता, ओपी माटा व अशोक पांचाल मौजूद रहे।
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