झज्जर में पंचों के शपथ ग्रहण समारोह से जिले की सवारियों को मंगलवार को दिनभर परेशानियों का सामना करना पड़ा। लोगों को रोडवेज बस का सफर नहीं मिला और वह दिनभर निजी वाहनों को तलाशते रहे। करनाल डिपो से झज्जर स्थित समारोह में 71 बसें गई। इन 71 बसों को जिले के विभिन्न मार्गों से हटाया गया। इससे लोकल सवारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि जो व्यवस्था है उसके मुताबिक बेहतर सफर दे रहे हैं।
जिले में रोडवेज बेड़े में सवारियों के मुकाबले में बसों की संख्या बहुत कम है। 300 बसों के आवश्यकता वाले बेड़े में मात्र 186 बसें हैं। इनमें से 71 बसें समारोह में भेजने से 115 बस रह गई और इनमें से पांच बसें कंडम होने के कारण चल नहीं पाती। इसलिए 110 बसों के सहारे मंगलवार को सवारियों को परेशानी हुई।
रोडवेज बसें न मिलने से सवारियों ने रोष जताया। सवारियों ने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे वह निजी वाहनों का उपयोग कर सकें। लोगों के लिए चलाई गई बसों को समारोह में भेजकर पब्लिक को परेशान किया जा रहा है। डिपो में बसों की संख्या बढ़ाने की बजाये कम की जा रही है। आए दिन प्रदेश स्तर के प्रोग्राम में रोडवेज बसों को लगा दिया जाता है।
जिले में असंध, कैथल जैसे कई मार्गों पर सात मिनट की सर्विस है। मंगलवार को बस कम होने के कारण सवारियों को 15 से 20 मिनट तक बस नहीं मिली। इस टाइम में बस निर्धारित स्टॉपेज से भरती रही और बीच में पड़ने वाले अड्डों की सवारियों को खड़े होने का भी रास्ता नहीं मिला। मंगलवार सुबह विद्यार्थियों ने बसों की छत पर सफर किया और महिलाओं ने बसों के अंदर खड़े होकर सफर किया। बसें बिलकुल भरकर चली।
सवारियों में आपस में सीट नंबर को लेकर बहस होती रही। बस में ड्राइवर-कंडक्टर ने सवारियों को मजबूरी का बहाना बनाकर शांत किया। बस न रोकने पर रास्ता रोककर बसों को रूकवाया। रोडवेज कर्मचारियों ने कहा कि निजी बसों को फायदा देने के लिए रोडवेज बसों के जान बुझकर चक्कर मिस कराए जा रहे हैं। इस मामले में जीएम जयपाल राणा ने बताया कि जो व्यवस्था है उसके मुताबिक बेहतर सफर दे रहे हैं। पंचों को झज्जर भेजने के लिए बसों की ड्यूटी लगाई गई थी। कल से सारी बसें अपने-अपने रूटों पर चलेंगी।