- जिला नागरिक अस्पताल में हर दिन पहुंच रहे 39 पीड़ित, अब तक 25 हजार रेबीज रोधी टीके लगे
काजल पांचाल
करनाल। जिले में कुत्तों, बंदरों, बिल्लियों और चूहों के काटने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी से जून तक 6974 लोग एनिमल बाइट का शिकार होकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंच चुके हैं। बीते साल यह आंकड़ा 6530 था, जो इस साल आधे में ही पार हो चुका है।
हर दिन औसतन 39 लोग अस्पताल की ओपीडी में एनिमल बाइट के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा मामले कुत्तों के काटने के हैं, लेकिन बंदरों, बिल्लियों और चूहों के हमले भी बढ़े हैं। इस साल में अब तक 6974 मरीजों को उपचार के तहत करीब 25 हजार एंटी-रेबीज वैक्सीन के डोज लगाए जा चुके हैं। -संवाद
इलाज की प्रक्रिया
एनिमल बाइट के मामलों में रैबीज जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा सबसे बड़ा है। अस्पताल में आने वाले मरीजों को तय प्रोटोकॉल के तहत एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई जाती है, जिसकी कुल चार डोज होती हैं। पहली डोज काटने के दिन बाकी डोज तीसरे, 7वें, 14वें और कई मरीजों को डॉक्टर की सलाह और मरीज की स्थिति अनुसार पांचवीं बूस्टर डोज भी लगाई जा सकती है।
जानवर के हिसाब से इलाज तय-
आवारा कुत्ते का काटना : चार डोज एंटी-रैबीज वैक्सीन।
बंदर का काटना : हमेशा चार डोज।
बिल्ली का काटना : पालतू हो तो डॉक्टर की सलाह अनुसार, आवारा हो तो चार डोज अनिवार्य।
चूहा : सामान्य परिस्थितियों में खतरा कम, जंगली या संदिग्ध स्थिति में डॉक्टर की सलाह अनुसार इलाज।
रैबीज का संक्रमण जानलेवा होता है, इसका समय पर पूरा इलाज ही बचाव है। किसी भी जानवर के काटने या खरोंचने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें और वैक्सीन का पूरा कोर्स जरूर करवाएं। इलाज अधूरा छोड़ना बेहद खतरनाक हो सकता है।
- डॉ. दीपक गोयल