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ड्रग कंट्रोल टीम ने इंद्रा नगर में छापा मारा, नकली दवाएं पकड़ीं

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करनाल। चंडीगढ़ से आई ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी की टीम ने जुंडला गेट इंद्रा नगर कॉलोनी में छापा मारकर नकली एंटीबायोटिक टैबलेट और उनको बनाने का सामान बरामद किया है। इन दवाओं के नमूने लेकर परीक्षण के लिए लेबोरेटरी भेजे जाएंगे। देर रात तक चली छापा मार कार्रवाई के दौरान बरामद की गईं टैबलेट, रैपर, साल्ट तथा अन्य सामान को जब्त कर लिया है। ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी की इस कार्रवाई की जानकारी मिलते ही शहर की कई ड्रग की दुकानें बंद हो गईं और उनमें हड़कंप मच गया। ड्रग कंट्रोल ऑफिसर ने बताया कि इस फैक्टरी का मालिक संजीव वर्मा है जोकि फरार है।
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स्टेट ड्रग अथॉरिटी की टीम में डिप्टी स्टेट ड्रग कंट्रोल ऑफिसर मनमोहन सिंह, उनके सीनियर ड्रग कंट्रोल ऑफिसर प्रविंद्र मलिक, ड्रग कंट्रोल ऑफिसर सुनील दहिया ने संयुक्त रूप से छापामारी की। छापामारी के दौरान वहां से एंटीबायोटिक टैबलेट के आठ नमूने लिए है। ड्रग कंट्रोल अथारिटी के अधिकारियों ने बताया कि मौके से उनको अहमदाबाद की एमाजोन कंपनी के नाम से दवा के रैपर मिले हैं। कुछ बनी और पेक की हुईं टैबलेट बरामद हुई है। इसी तरह करनाल की आईकोन हेल्थ लाइन कंपनी के नाम से भी दवा बनाई जा रही थी। जबकि इस कंपनी की शिकायत पर ही चंडीगढ़ की टीम ने छापामारी की है।

शिवा एसोसिएट के नाम से चल रही थी यह फैक्टरी
इंद्रा कॉलोनी में यह फैक्टरी शिवा एसोसिएट के नाम से चल रही थी। आस-पास के लोगों को भी यह नहीं पता था कि यहां अवैध दवाइयां बनाई जाती हैं। क्योंकि मालिक ने फैक्टरी के बाहर कोई बोर्ड भी नहीं लगाया हुआ था। मकान में एक कमरे में ऑफिस और एक बड़ा गोदाम था। जहां दवाईयों को बनाने व पेकिंग का काम जोरों पर चल रहा था।
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ड्रग कंट्रोल ऑफिसर सुनील दहिया ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि इंद्रा कॉलोनी में बिना लाइसेंस के दवाइयां बनाईं जा रही हैं। उसी के बाद एक टीम बनाई गई थी और फिर फैक्टरी पर छापा मारा गया।

अहमदाबाद की एमाजोन और करनाल की आइकोन हेल्थ लाइन के नाम से एंटीबायोटिक टेबलेट बनाईं जा रहीं थीं। जिनमें प्रथम दृष्टया साल्ट के नाम पर सफेद और रंगीन पाउडर का इस्तेमाल होने की जानकारी मिली है। जिसकी पुष्टि प्रयोगशाला से इन नमूनों की रिपोर्ट के आधार पर होगी। फिलहाल वहां मिले माल को जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई करनाल की आइकोन कंपनी के असली मालिक की शिकायत पर की गई है।
सुनील दहिया, ड्रग कंट्रोल आफिसर, करनाल।

एंटीबायोटिक नकली दवाएं बनाकर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ है। मरीज और उनके परिवार समझेंगे कि इन दवाओं से फायदा नहीं हो रहा है। ऐसे में मरीज का डाक्टर से विश्वास हट जाता है। दूसरे गंभीर हालत वाले मरीज की जान का खतरा बना रहता है।
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-डॉ. संजीव ग्रोवर, फिजीशियन
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