- 5286 लोगों को विभाग दे चुका नोटिस, पिछले वर्ष मिले थे 561 मरीज
राकेश चौहान
करनाल। इस वर्ष डेंगू के सबसे अधिक केस आए हैं। जो नौ सालों में सर्वाधिक हैं। मंगलवार को भी जिले में डेंगू के छह पॉजिटिव केस सामने आए हैं। जिससे आंकड़ा 586 तक पहुंच चुका है। यदि 2018 से अभी तक की बात करें तो इस वर्ष सबसे अधिक मरीज डेंगू की चपेट में आए हैं। हालांकि पिछले वर्ष डेंगू के 561 केस थे और चार लोगों की मौत भी हुई थी। इस वर्ष डेंगू से मौत का एक भी केस स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में नहीं है लेकिन डेंगू के केस थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
यह आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग का है लेकिन प्राइवेट अस्पतालों की स्थिति देखें तो संदिग्ध डेंगू के मरीजों से उनके बेड भरे हुए हैं। उन मरीजों को प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों ने डेंगू बताया है। स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि उनकी टीमें निरंतर शहर व ग्रामीण क्षेत्र में घर-घर जाकर लार्वा की जांच कर रही है लेकिन आंकड़ों को देखें तो यह दावे फेल नजर आ रहे हैं। वहीं लोगों का कहना है कि डेंगू के केस बढ़ने का मुख्य कारण यह भी है कि जिले में फॉगिंग खानापूर्ति के तौर पर हुई है। यदि संबंधित विभाग समय पर फॉगिंग करता तो डेंगू के केस कम होते।
स्वास्थ्य विभाग की वर्क रिपोर्ट
कुल टीमें - 166
घरों की जांच की - 1454926
घरों में लार्वा मिला 10609
घर के मालिकों को नोटिस दिए 5286
डेंगू के टेस्ट किए 17375
डेंगू पॉजिटिव 586
-नौ सालों में ये थी डेंगू की स्थिति
वर्ष - संदिग्ध- पॉजिटिव- मौत
2015 534 215 01
2016 169 23 00
2017 655 234 00
2018 627 106 00
2019 111 29 00
2020 560 93 00
2021 5000 304 02
2022 2272 335 02
2023 6547 561 04
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बचाव के लिए ये करें
- प्रत्येक रविवार को ड्राई डे के रूप में मनाएं।
- शुक्रवार को कार्यालय परिसर में से भी पानी के कंटेनर, कूलर, ओवरहेड एवं ग्राउंड टैंक, रेफ्रिजरेटर की पिछली टेऊ, फूलों के गमले, पक्षियों के स्नान के लिए रखे बर्तन आदि खाली कर दें।
- छत पर रखी पानी की टंकियों और अन्य घरेलू पानी के कंटेनरों को ढक कर रखें।
- कीटनाशक उपचारित मच्छरदानी के अंदर सोएं।
- पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
- बुखार आने पर डॉक्टर से सलाह लें।
ये न करें।
- घरों के अंदर तथा आसपास के गड्ढों, निचले इलाकों आदि में एक सप्ताह से अधिक समय तक पानी जमा न रहने दें।
- टायर, टयूब, प्लास्टिक कंटेनर, पॉलिथीन बैग, डिस्पोजेबल कप, ग्लास आदि जैसी बेकार वस्तुओं को खुले में या छत पर न फेंकें।
- यदि खुले में पड़ी वस्तुओं को हटाना संभव न हो तो उन्हें ढक कर रखा जा सकता है ताकि उनमें बरसात का पानी जमा न हो सके।
- कूलर का उपयोग न हो उसमें पानी न भरें।
- एस्प्रिन, ब्रूफेन आदि दवाइयां स्वयं न लें।
वर्जन
डेंगू को लेकर विभाग की कुल 166 टीमें हैं। जो घर-घर जाकर लार्वा की जांच कर रही है। इनमें 150 टीमें ग्रामीण क्षेत्र की हैं और 16 टीमें शहर में काम कर रही हैं।
डेंगू से बचाव के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। यह टीमें लोगों को जागरूक भी कर रही हैं और लार्वा मिलने पर नोटिस भी दिया जाता है।
डॉ. लोकवीर, सीएमओ करनाल