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डीएफएससी का कमाल : अलाटमेंट के बिना ही जारी कर दिया धान

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अमर उजाला ब्यूरो
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तरावड़ी/करनाल। जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने कमाल कर दिया। इस बार विभाग ने ऐसे राइस मिल को धान अलॉट कर दी, जिसे जिला मिलिंग कमेटी द्वारा धान के लिए अलाटमेंट ही नहीं दी गई थी। इस मामले की शिकायत जनक सिंह ने डीसी करनाल और प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को की है। शिकायत मिलते ही डीसी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
बता दें कि एक अक्तूबर से धान की सरकारी खरीद शुरू हुई थी। खरीद एजेंसियों द्वारा धान की सरकारी खरीद करने के लिए जिला मिलिंग कमेटी द्वारा जिले में कई राइस मिलों को अलाटमेंट जारी की गई थी। परंतु तरावड़ी मंडी में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने किसान राइस मिल को अलाटमेंट के बिना ही किसान राइस मिल द्वारा सरकारी धान की खरीद शुरू कर दी गई। शिकायत के अनुसार, जनक कुमार ने आरोप लगाया कि विभाग ने सभी नियमों को ताक पर रख दिया। धान की सीजन से पहले ही धान के लिए अलाटमेंट लेनी होती है। इसके लिए विभाग ने बाकायदा आवेदन मांगे थे। अब सीजन जाने को है, अब तक पांच राइस मिल ऐसे हैं, जिनके पास अलाटमेंट नहीं है, बावजूद इसके इनको धान की खरीद करा दी गई। इनमें तरावड़ी, घरौंडा और निसिंग के राइस मिल हैं। इनके नाम पर लाखों क्विंटल धान अलाट की गई है, अब विभाग धान अलाट के बाद अब विभाग से इसकी परमिशन मांगने के प्रयास कर रहा है।
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हालांकि, विभाग के डायरेक्टर और एसीएस इसकी परमिशन देने से इंकार कर चुके हैं। हालांकि, 6 अक्तूबर से राइस मिल खरीद कर रहा है, जबकि विभाग के डीएफएससी का दावा है कि 19 अक्तूबर को परमिशन मिली है। ऐसे में संबंधित विभाग के इंस्पेक्टर ने लापरवाही बरते हुए नियमों की उल्लंघना की है। शिकायत में ये भी आरोप है कि विभाग के अधिकारी आनन-फानन में गुप्त तरीके से इसके लिए विभाग से परमिशन मांग रहे हैं। हालांकि, विभाग के डायरेक्टर से लेकर एसीएस तक इस परमीशन से मना कर चुके हैं, क्योंकि अब सीजन लगभग खत्म हो चुका है। आशंका जताई जा रही है कि ऐसा करने में बड़ा घालमेल हुआ है।

पत्र में इन राइस मिल के लिए मांगी गई परमिशन
डीएफएससी करनाल द्वारा 5 अक्तूबर को विभाग के निदेशक को पत्र लिखकर अलाटमेंट की परमिशन मांगी गई थी। इनमें मै. किसान राइस मिल, तरावड़ी, मै. टीसी एग्रो फूड इंडस्ट्रीज, निसिंग, मै. श्रीहरिहर ओवरसीज, निसिंग, मै. रोहित ट्रेडिंग कंपनी, घरौंडा, मै. अनुज राइस मिल, घरौंडा शामिल है।

जिस दिन मांगी अनुमति, उससे अगले दिन ही शुरू करा दी खरीद
तरावड़ी के राइस मिल मिल किसान राइस मिल ने 6 अक्तूबर को ही खरीद शुरू कर दी, जबकि डीएफएससी की ओर से 5 अक्तूबर को ही विभाग के डायरेक्टर को अनुमति के लिए पत्र लिखा था। इसकी एवज में डायरेक्टर ने 15 अक्तूबर को अनुमति देने से मना कर दिया। बावजूद इसके खरीद कराई गई। इस मामले में खास बात ये रही कि विभाग ने अनुमति का इंतजार ही नहीं किया और खुद ही मिलीभगत करके खरीद करा दी गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बिना मिलीभगत के ऐसा नहीं हो सकता। सवाल ये है कि जब अलाटमेंट ही नहीं थी तो किसान राइस मिल ने आखिरकार खरीद किसकी शह पर की? इस पूरे मामले में डीएफएससी विभाग के इंस्पेक्टर की भूमिका संदेह के घेरे में है।
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डीएफएससी के गोलमोल जवाब, डीसी बोले कराएंगे जांच
इस बारे में डीएफएससी कुशल बूरा का कहना है कि इनकी परमिशन आ चुकी है, परमिशन 19 अक्तूबर को मिली है। हालांकि, जब उनसे 6 अक्तूबर से किसान राइस मिल द्वारा धान की खरीद करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो इनकी लिफ्टिंग नहीं की जाएगी। हालांकि, बता दें कि लिफ्टिंग पहले से ही हो चुकी है। वहीं, इस बारे में डीसी डॉ. आदित्य दहिया का कहना है कि इस मामले की जांच कराई जाएगी।
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