अमर उजाला ब्यूरो
करनाल (घरौंडा)। गांव बसताड़ा स्थित टोल प्लाजा पर लोकल वाहनों को नि:शुल्क निकालने पर पाबंदी लगाने के फैसले 20 दिन बाद ही कंपनी को बैकफुट पर आना पड़ा है। स्थानीय ग्रामीणों और घरौंडा की सामाजिक संस्थाओं के विरोध को देखते हुए और लगातार बढ़ रहे प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव के चलते आखिरकार कंपनी ने छोटे लोकल वाहनों को फिर से टोल फ्री करने का फैसला लिया है।
हालांकि, इसके लिए वाहन चालक को लोकल होने का असली दस्तावेज दिखाना होगा। इसके साथ ही ये भी फैसला लिया गया है कि लोकल स्तर के मल्टीएक्सेल वाहनों (बड़े वाहनों) को नि:शुल्क जाने के लिए लिस्ट प्रशासन फाइनल करेगा, इसके बाद ही वे नि:शुल्क जा सकेंगे। दोबारा से टोल फ्री की सुविधा मिलने पर लोकल वाहन चालकों ने राहत की सांस ली है।
नेशनल हाईवे पर बसताड़ा के पास स्थित टोल प्लाजा पर लगभग 20 से उपजा विवाद राजनीतिक और प्रशासनिक लोगों के लिए सिरदर्द बना हुआ था। इसको लेकर, हलका विधायक हरविंद्र कल्याण ने कुछ दिन पूर्व टोल हटाओ संघर्ष समिति की 31 सदस्यीय कमेटी के साथ बैठक कर टोल के मुद्दे को सुलझाने का आश्वासन दिया था और सोमवार को इस मामले में टोल कंपनी के अधिकारियों से बातचीत करने की बात कही थी।
सोमवार को आईजी नवदीप विर्क, एसपी सुरेंद्र भौरिया, टोल कंपनी के डीजीएम संजय माथुर और टोल संघर्ष समिति के सदस्यों की बैठक आईजी ऑफिस करनाल बुलाई गई। बैठक लगभग एक घंटे तक चली, जिसमें फैसला लिया गया कि कार, जीप और अन्य छोटे वाहन चालक अपने लोकल ओरिजनल डॉक्यूमेंट दिखाकर निशुल्क आवाजाही कर सकते हैं, जबकि मल्टी एक्सेल व्हीकल के चालकों को अपनी लिस्ट जिला प्रशासन को सौंपनी होगी। लिस्ट वेरिफाई होने के बाद ही इन वाहनों को आवागमन की सुविधा दी जाएगी। साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों ने टोल संघर्ष समिति के सदस्यों को निर्देश देते हुए कहा कि कोई भी लोकल फर्जी आईडी मिली तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बातचीत के बाद दोनों पक्षों में सहमति हो गई। इसके बाद लोकल वाहन चालकों ने राहत की सांस ली है। टोल संघर्ष समिति के सदस्य राजीव सैन, मुनीष गुप्ता, राजबीर सिंह, राजकुमार राणा, रिंकू राणा, सुरेंद्र सिंगला व अन्य लोगों ने बताया कि टोल कंपनी व प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हुई बैठक में टोल कंपनी ने लोकल वाहन चालकों को पहले की तरफ टोल से फ्री निकलने की सुविधा दे दी है। फिलहाल यह सुविधा कार, जीप व छोटे वाहनों को यह सुविधा मिली हैं, उसमें भी वाहन चालकों को अपने वाहन के ओरिजनल कागजात दिखाने होंगे, जबकि मल्टी एक्सेल व्हीकल के लिए जिला प्रशासन की ओर से लिस्ट फाइनल होकर आएगी। लोकल वाहन चालकों के लिए जी का जंजाल बनी इस समस्या के समाधान में हल्का विधायक हरविंद्र कल्याण ने बहुत सहयोग किया हैं। इसके लिए वे उनके आभारी हैं।
कंपनी ने लगाया था पास बनवाने का नोटिस
बसताड़ा टोल प्लाजा के बूथों पर टोल कंपनी की ओर से एक नोटिस चस्पा दिया गया था। इसमें लोकल वाहन चालकों को 15 जून तक टोल पास बनवाने का फरमान जारी कर दिया गया था। फरमान जारी होने के बाद शहीद मलखान सिंह क्रांतिकारी जागृति मंच ने शहरवासियों के साथ इस मुद्दे को लेकर लड़ाई लड़ने का एलान कर दिया था। इसके बाद से ही लोकल वाहन चालकों में टोल कंपनी के प्रति रोष बढ़ गया था। इसको लेकर लोकल वाहन चालकों व शहरवासियों ने टोल कंपनी के अधिकारियों को अपना फैसला वापस लेने के लिए अल्टीमेटम भी दिया था। इसके बाद टोल पर प्रदर्शन हुए और घरौंडा बंद तक की नौबत आ गई। इस मामले में विधायक और एमपी करनाल की ओर से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पत्र भी लिखें गए थे।
टोल विवाद का मामला जैसे ही मेरे संज्ञान में आया तो मैंने प्रदेश मुख्यमंत्री से बात की थी। लगभग पांच दिन से प्रशासनिक और टोल अधिकारियों से बैठकों का दौर जारी था। मैंने लोगों से संयम बनाए रखने की अपील की है, ताकि क्षेत्र का वातावरण ठीक रहे। वहीं, टोल अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे वाहन चालकों के साथ अपना बर्ताव ठीक रखें और लोगों को हर प्रकार की सुविधा देने का प्रयास करें।
-हरविंद्र कल्याण, विधायक हल्का घरौंडा।
आईजी समेत प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई बैठक में
फैसला लिया गया है। इसके तहत, छोटे वाहन चालक जैसे कार, जीप और अन्य व्हीकल अपने ओरिजनल डॉक्यूमेंट दिखाकर पहले की तरह नि:शुल्क आवाजाही कर सकते हैं। मल्टी एक्सेल व्हीकल की लिस्ट जिला प्रशासन द्वारा फाइनल करवाई जाएगी। इसके बाद इन वाहनों को भी यह सुविधा मिल सकेगी।
-संजय माथुर, डीजीएम, टोल कंपनी।
प्रशासन की ओर से कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार नहीं
लोकल वाहनों को टोल फ्री कराने को लेकर एक तरफ जहां टोल हटाओ संघर्ष समिति के सदस्यों ने दावा किया कि एक घंटे तक चली प्रशासनिक व कंपनी के अधिकारियों की बैठक में पहले वाली व्यवस्था बहाल कर दी गई है। इसके तहत स्थानीय वाहन अपनी आईडी दिखाकर निशुल्क जा सकेंगे। हालांकि, इस मामले में न तो आईजी करनाल नवदीप सिंह विर्क की ओर से कोई बात कही गई और न ही एसपी करनाल की तरफ से। खुद विधायक हरविंद्र कल्याण का कहना है कि संघर्ष समिति के सदस्यों ने बताया है कि उनकी मांग मान ली गई है।